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Sunday, 30 June 2013

अंधाधुंध विकास, पड़ी प्रायश्चित रोवे-

होवे हृदयाघात यदि, नाड़ी में अवरोध ।
पर नदियाँ बाँधी गईं, बिना यथोचित शोध ।

बिना यथोचित शोध, इड़ा पिंगला सुषुम्ना ।
रहे त्रिसोता बाँध, होय क्यों जीवन गुम ना ?

अंधाधुंध विकास, पड़ी प्रायश्चित रोवे ।
भौतिक सुख की ललक, तबाही निश्चित होवे ।।
त्रिसोता = भागीरथी ,अलकनंदा और मन्दाकिनी

बरसाती चेतावनी,  चूक चोचलेबाज |
डूबे चारोधाम जब, चौकन्ना हो राज |

चौकन्ना हो राज, बहाया तिनका तिनका |
गिरा प्रजा पर गाज, नहीं कुछ बिगड़ा इनका |

जल-समाधि जल-व्याधि, बहा मलबा आघाती |
इधर इंद्र उत्पात , उधर इंद्रा का नाती ||

Friday, 28 June 2013

नेता रह मत भूल में, मत-रहमत अनमोल-

मत की कीमत मत लगा, जब विपदा आसन्न ।
आहत राहत चाहते, दे मुट्ठी भर अन्न ॥

आहत राहत-नीति से, रह रह रहा कराह |
अधिकारी सत्ता-तहत, रिश्वत रहे उगाह ॥

घोर-विपत आसन्न है, सकल देश है सन्न ।
सहमत क्यूँ नेता नहीं, सारा क्षेत्र विपन्न ॥

नेता रह मत भूल में, मत-रहमत अनमोल |
ले जहमत मतलब बिना, मत शामत से तोल ॥

Thursday, 27 June 2013

जय जय जय हे वीर, भगा दें आई शामत |

 (1)
कीमत मत मानव लगा, महा-मतलबी दृष्टि |
हिम्मत से टकरा रहे, भरी चुनौती सृष्टि | 

भरी चुनौती सृष्टि, वृष्टि कुहराम मचाये |
अहंकार हो नष्ट, तिगनिया नाच नचाये |

जय जय जय हे वीर, भगा दें आई शामत |
सादर तुम्हें प्रणाम, चुकाई भारी कीमत || 
(2)

नमन नमस्ते नायकों, नम नयनों नितराम |
क्रूर कुदरती हादसे, दे राहत निष्काम  |

दे राहत निष्काम, बचाते आहत जनता |
दिए बगैर बयान, हमारा रक्षक बनता |

अमन चमन हित जान, निछावर हँसते हँसते |
भूले ना एहसान, शहीदों नमन नमस्ते -

Tuesday, 25 June 2013

ज़िंदा लेते लूट, लाश ने जान बचाई -




खानापूरी हो चुकी, गई रसद की खेप । 
खेप गए नेता सकल, बेशर्मी भी झेंप । 

बेशर्मी भी झेंप, उचक्कों की बन आई । 
ज़िंदा लेते लूट, लाश ने जान बचाई । 

भूखे-प्यासे मौत, उठा दुनिया से दाना ।
रहे दुबारा न्यौत, बने फिर मुर्दाखाना ॥



नंदी को देता बचा, शिव-तांडव विकराल । 
भक्ति-भृत्य खाए गए, महाकाल के गाल । 
 

महाकाल के गाल, महाजन गाल बजाते । 

राजनीति का खेल, आपदा रहे भुनाते । 
 

आहत राहत बीच, चाल चल जाते गन्दी । 

हे शिव कैसा नृत्य, बचे क्यूँ नेता नंदी ॥


तप्त-तलैया तल तरल, तक सुर ताल मलाल ।

ताल-मेल बिन तमतमा, ताल ठोकता ताल ।


ताल ठोकता ताल, तनिक पड़-ताल कराया ।

अश्रु तली तक सूख, जेठ को दोषी पाया ।


कर घन-घोर गुहार, पार करवाती नैया ।

तनमन जाय अघाय, काम रत तप्त-तलैया ।
तक=देखकर

 



Friday, 7 June 2013

डायलिसिस पर देश, डाक्टर खोये आला-

 आला अधिकारी अड़त, मकु मंत्री मशगूल |
शर्मिंदा मठ-मेडिकल, हरकत ऊल-जुलूल |
हरकत ऊल-जुलूल, खुले हैं सेंटर ट्रामा |
कितनी  मंहगी मौत, होय संसद में ड्रामा |
पब्लिक की दुर्दशा, पड़ा सत्ता से पाला |
डायलिसिस पर देश, डाक्टर खोये आला ||