Sunday, 24 November 2013

दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |


दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |                                             
निबट सके जो ठीक से, राजा हो या रंक |

राजा हो या रंक, बढ़ी कितनी घटनाएं-
जब तब मारे डंक, इन्हें जल्दी निबटाएं |

तंतु तंतु में *तोड़, बड़े संकट में तन्त्रा |
कैसे रक्षण होय, देव कुछ दे दो मन्त्रा -

Saturday, 23 November 2013

दिनभर बैठ निकालते, ये नरेश गर बाल-

दिनभर बैठ निकालते, ये नरेश गर बाल |
बनत बाल की खाल से, कम से कम इक नाल |

कम से कम इक नाल, लगा घोड़े को देते |
यू पी दुर्गति-काल, प्रगति पथ पर ले लेते |

व्यापारी पर व्यंग, मिलावट करता जमकर |
रहा चाय को कोस, बैठ बन्दा यह दिनभर ||

Friday, 22 November 2013

नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग-

यौन उत्पीड़न किसे कहते हैं?

DR. ANWER JAMAL 




(1)
आगे मुश्किल समय है, भाग सके तो भाग |
नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग |

साथ फूस के आग, जागते रहना बन्दे |
हुई अगर जो चूक, झेल क़ानूनी फंदे |

जिनका किया शिकार, आज वे सारे जागे |
मिला जिन्हें था लाभ, नहीं वे आयें आगे ||



बंगारू कि आत्मा, होती आज प्रसन्न |
सन्न तहलका दीखता, झटका करे विपन्न |

झटका करे विपन्न, सताया है कितनों को |
लगी उन्हीं कि हाय, हाय अब माथा ठोको |

गोया गोवा तेज, चढ़ी थी जालिम दारू |
रंग दे डर्टी पेज, देखते हैं बंगारू ||
यौनोत्पीड़न के लिए, कुर्सी छोड़े आप |

कुर्सी छोड़े आप, मात्र छह महिना काहे |
सहकर्मी चुपचाप, बॉस जो उसका चाहे |

लेता आज संभाल, देख लेता कल कल का |
तरुण तेज ले पाल, सेक्स से मचे तहलका ||

Wednesday, 20 November 2013

लाज लुटी, बस्ती बटी, दंगाई तदवीर-

दागी बंदूकें गईं, चमकाई शमशीर |
लाज लुटी, बस्ती बटी, दंगाई तदवीर |

दंगाई तदवीर, महत्वाकांक्षा खाई |
दिया-सलाई पाक, अगर-बत्ती सुलगाई |

सूत्रधार महफूज, जली तो धरा अभागी |
बने पाक इक पक्ष, बनाये दूजा दागी ||

Tuesday, 19 November 2013

अन्ना करे विलाप, हमारे धन से लड़ता-

लड़ता भ्रष्टाचार से, आज आप हित आप |
आप दुखी है बाप से, अन्ना से सन्ताप |

अन्ना से सन्ताप, चंद चंदे का चक्कर |
सदाचार संदिग्ध, हुआ है चेला शक्कर |

आंदोलन से आप, इलेक्शन खातिर बढ़ता |
अन्ना करे विलाप, हमारे धन से लड़ता ||

Monday, 18 November 2013

शीला का दुःख देखिये, शहजादे का क्रोध-

प्यासी बहनें जा रहीं, रुकने का अनुरोध |
शीला का दुःख देखिये, शहजादे का क्रोध |

शहजादे का क्रोध, मन:स्थित समझ करीबी |
करते रहते शोध, किन्तु नहिं ख़तम गरीबी |

रविकर देखें बोय, खेत में सत्यानाशी |
बढ़िया पैदावार, बहन पर भूखी-प्यासी ||


भाषण सुनकर जाइये, पूरी करिये साध |
एक घरी आधी घरी, आधी की भी आध |

आधी की भी आध, विराजे हैं शहजादे |
करिये वाद-विवाद, किन्तु सुनिये ये वादे |

शीला कहे पुकार, जानती यद्यपि कारण |
जाने को सरकार, फर्क डाले क्या भाषण || 

Sunday, 17 November 2013

पति प्रेमी पितु-मातु, करा सकते जासूसी-

छोरे ताकें छोरियां, वक्त करे आगाह |
मर्यादा मत भूलना, दुनिया रखे निगाह |

दुनिया रखे निगाह, शुरू है कानाफूसी |
पति प्रेमी पितु-मातु, करा सकते जासूसी |

फिर महिला आयोग, सूत्र यह सकल बटोरे |
दृष्टि-दोष कर दूर, बिगाड़े खेल छिछोरे ||