Tuesday, 14 January 2014
भावी रहे सुधार, शहर ला दादा-दादी-
खिले खिले बच्चे मिले, रहे खिलखिला रोज ।
बुझे-बुझे माँ-बाप पर, रहे मदर'सा खोज ।
रहे मदरसा खोज, घूस की दुनिया आदी
।
भावी रहे सुधार, शहर ला दादा-दादी।
पैतृक घर
दे
बेंच
, आय उपयुक्त राशि ले ।
करे सुरक्षित सीट, आज यूँ मिलें दाखिले ॥
Monday, 13 January 2014
रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से-
खतरे से खिलवाड़ पर, कारण दिखे अनेक |
थूक थूक कर चाटना, घुटने देना टेक |
घुटने देना टेक, अगर हो जाए हमला |
होवे आप शहीद, जुबाँ पर जालिम जुमला |
भाजप का अपराध, उसी पर कालिख लेसे |
रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से ||
Saturday, 11 January 2014
है चोटी में खोट, करे चिंता क्यूँ भारत-
भारत बांगला-देश में, बहुत बड़ा है फर्क |
यहाँ स्वर्ग इनके लिए, वहाँ बनाया नर्क |
वहाँ बनाया नर्क, अल्पसंख्यक आबादी |
करते नहीं कुतर्क, यहाँ हैं अम्मा दादी |
कई नरक से भाग, हजारों स्वर्ग-सिधारत |
है चोटी में खोट, करे चिंता क्यूँ भारत ||
पूरण खण्डेलवाल
चुनावों के बाद बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यको पर
लगातार हमले हो रहे हैं लेकिन इससे सेक्युलर
मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता ।
Friday, 10 January 2014
जाय भाड़ में देश, भाड़ में जाए दिल्ली-
मुफ़्तखोर है इस देश कि जनता
ZEAL
ZEAL
दिल्ली की सरकार में, पी एम् केजरिवाल |
गृहमंत्री भूषण बने, ले कश्मीर सँभाल |
ले कश्मीर सँभाल, जैन की क्रान्ति गुलाबी |
राखी का कल्याण, गला बच्चे का दाबी |
जुड़े आप से लोग, तोड़ती छींका बिल्ली |
जाय भाड़ में देश, भाड़ में जाए दिल्ली ||
आप छुवे आकास, खेल मोदी का भाड़े-
(1)
लोकसभा में
आपकी, आई सीट पचास |
लगे पलीता ख़्वाब में, टूटे भाजप आस |
टूटे भाजप आस, विपक्षी मौका ताड़े |
आप छुवे आकास, खेल मोदी का भाड़े |
माना अनुभवहीन, मीडिया लेकिन थामे |
कर दे सत्तासीन, त्रिशंकुल
लोकसभा में
||
09 DECEMBER, 2013
सबको माने चोर, समर्थन ले ना दे ना -
कुंडलियां
लेना देना
जब नहीं, करे तंत्र को बांस |
लोकसभा में आप की, मानो सीट पचास |
मानो सीट पचास, इलेक्शन होय दुबारे |
करके अरबों नाश, आम पब्लिक को मारे |
अड़ियल टट्टू आप, अकेले नैया खेना |
सबको माने चोर, समर्थन
ले ना दे ना
||
Wednesday, 8 January 2014
पड़े शीत की मार, आप ही मालिक मेरे-
2
3
4
5
6
7
ठंड से ठिठुरती दिल्ली
रैन बसेरे में बसे, मिले नहीं पर आप |
आम मिला इमली मिली, रहे अभी तक काँप |
रहे अभी तक काँप, रात थी बड़ी भयानक |
होते वायदे झूठ, गलत लिख गया कथानक |
पड़े शीत की मार
, आप ही मालिक मेरे |
तनिक दीजिये ध्यान
, सुधारें रैन बसेरे ||
रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ -
कुछ पॉलिटिकल
(१)
आओ जब मैदान में, समझ बूझ हालात |
मजे मजे मजमा जमे, जमघट जबर जमात |
जमघट जबर जमात, आप करिये तैयारी |
क़ाबलियत कर सिद्ध, निभाओ जिम्मेदारी |
रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ |
अहंकार व्यवहार, बाज बड़बोले आओ ||
(२)
बहना बह ना भाव में, हवा बहे प्रतिकूल |
दिग्गज अपने दाँव में, दिखे झोंकते धूल |
दिखे झोंकते धूल, आँख में भरकर पानी |
तोड़े कई उसूल, किये अब तक मनमानी |
ले राहुल आलम्ब, सदा सत्ता में रहना |
दिखलाते नित दम्भ, संभलना छोटी बहना -
Friday, 3 January 2014
परिवर्तन का दौर, काल की घूमी चकरी-
फरी फरी मारा किया, घरी घरी हड़काय ।
मरी मरी जनता रही, दपु-दबंग मुस्काय ।
दपु-दबंग मुस्काय, साधु को रहा सालता।
लेकिन लगती हाय, साल यह बला टालता ।
परिवर्तन का दौर, काल की घूमी चकरी ।
अब जनता सिरमौर, कालिका जमकर बिफरी ॥
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)