रविकर की कुण्डलियाँ
Saturday, 4 December 2021

मशहूर कथाएं : काव्यानुवाद

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दो बैलों की कथा :मुंशी प्रेमचंद) (1) बछिया के ताऊ कहो, कहो गधा या बैल। हीरा मोती मे मगर, नहीं जरा भी मैल। नही जरा भी मैल, दोस्ती बैहद पक्की।...
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Thursday, 1 August 2019

काया

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काया महकाई सतत, लेकिन हृदय मलीन। चहकाई वाणी विकट, प्राणी बुद्धिविहीन। प्राणी बुद्धिविहीन, भरी है हीन भावना। खिसकी जाय जमीन, न...
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Friday, 14 September 2018

काव्य पाठ

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काव्य पाठ नमन हे राष्ट्रकवि दिनकर जयतु-जय रामधारी की | हमेशा सिंह से गरजे, सदा उसकी सवारी की | रथी बनकर बिखेरी रश्मि दिनकर कर्ण-अर्जु...
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Tuesday, 13 February 2018

बेलेन्टाइन -

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कुंडलियाँ छंद (5) बेला वेलंटाइनी, नौ सौ पापड़ बेल । वेळी ढूँढी इक बला, बल्ले ठेलम-ठेल ।  बल्ले ठेलम-ठेल, बगीचे दो तन बैठे । बजरंगी ...
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Sunday, 4 February 2018

अतिथि देवो भव -

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अभ्यागत गतिमान यदि, दुर्गति से बच जाय। दुख झेले वह अन्यथा, पिये अश्रु गम खाय। पिये अश्रु गम खाय, अतिथि देवो भव माना। लेकिन दो दिन ब...
Thursday, 14 December 2017

काव्य पाठ २८ जनवरी

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सोते सोते भी सतत्, रहो हिलाते पैर। दफना देंगे अन्यथा, क्या अपने क्या गैर।। दौड़ लगाती जिन्दगी, सचमुच तू बेजोड़  यद्यपि मंजिल मौत है,...
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Tuesday, 17 October 2017

देह देहरी देहरा, दो दो दिया जलाय -

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देह देहरी देहरा, दो दो दिया जलाय । कर उजेर मन गर्भ-गृह, दो अघ-तम दहकाय । दो अघ-तम दहकाय , घूर नरदहा खेत पर । गली द्वार-पिछवाड़, प्र...
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रविकर
वर्णों का आंटा गूँथ-गूँथ, शब्दों की टिकिया गढ़ता हूँ| समय-अग्नि में दहकाकर, मद्धिम-मद्धिम तलता हूँ|| चढ़ा चासनी भावों की, ये शब्द डुबाता जाता हूँ | गरी-चिरोंजी अलंकार से, फिर क्रम वार सजाता हूँ ||
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