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Saturday, 10 March 2012

चलो एकला, आया था जस, सबकी नैया लगी किनारे -

न पढ़ें कविता समझकर 

झेल अकेले खेल प्रभू  के, 
रेल ले गई अपने सारे ।
बेटा तो परदेश कमाता, 
पहले शेखी सदा बघारे ।।

होली में तनु-मनु का आना, 
झाँसी-झाँसा लक-लखनौआ
माँ को अपने साथ ले गई, 
भटके तन-मन द्वारे द्वारे ।।  

चलो एकला, आया था जस,
सबकी नैया लगी किनारे ।
सपने जीते बना कैरियर, 
रविकर तनहा हारे हारे ।।

Thursday, 20 October 2011

टिप्पण-रुप्पण एक सम, वापस मिली न एक |

किस्मत  में  पत्थर  पड़े,  माथे  धड़  दीवाल |
भंग  घोटते  कामजित,  घोटे  मदन  कमाल |
Deepavali To Complete With Gambling














घोटे  मदन  कमाल, दिवाली जित-जित आवै |
पा   जावे   पच्चास,  दाँव   पर   एक  लगावे |

रविकर  होय  निराश,  लगा  के  पूरे  सत्तर |
हार जाए सब दाँव, पड़े किस्मत में पत्थर ||
File:Bicycle-playing-cards.jpg
चौपड़ पर बेगम सजे, राजा बैठ अनेक |
टिप्पण-रुप्पण एक सम, वापस मिली न एक |

Custom Imprinted Playing Cards

वापस मिली न एक, दाँव रथ-हाथी-घोड़े |
 थोड़े चतुर सयान, टिपारा बैठे मोड़े |
File:Jack playing cards.jpg
कह रविकर कविराय, गया राजा का रोकड़ |
जीते सभी गुलाम, हारते रानी-चौपड़ ||
टिपारा=मुकुट के आकार की कलँगीदार  टोपी