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Sunday, 25 March 2012
पढ़ा लिखा भूगोल, देखता दिन में तारे -
विषय
रचना रवीन्द्र
भायी दीक्षित बुद्धि की, रचना हमें अपार ।
जोड़-गाँठ करते चला, मानव बारम्बार ।
मानव बारम्बार, भूलता छक्का-पंजा ।
ज्ञान भला विज्ञान, कसे हर रोज शिकंजा
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पढ़ा लिखा भूगोल, देखता दिन में तारे ।
तर्क-शास्त्र मजबूत, बाल की खाल उतारे ।
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