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Wednesday, 21 August 2013

नेता नापे मील, रुपैया बित्ता बित्ता-


 चुप्पा-चेंचर चौकसी, करे ख़ुदकुशी नोट |
उड़े हँसी उड़ती रहे, चलो बटोरें वोट |
चलो बटोरें वोट, योजना राम भरोसे |
होती बन्दर बाँट, गरीबी खुद को कोसे |
होता बंटाधार, फूलकर डालर कुप्पा |
चेंचर की बकवाद, बैठ कर ताके चुप्पा ||

बित्ता बित्ता बढ़ रहा, घाटा नित वित्तीय । 
गिरती मुद्रा देख के, जन-मुद्रा दयनीय । 

जन-मुद्रा दयनीय, नहीं लत-हालत बदले । 
दल दल दले-दलान, देश में ऊँचा पद ले । 

शास्त्री अर्थ अनर्थ, गिरेंगे देखो कित्ता । 
नेता नापे मील, रुपैया बित्ता बित्ता।।


रुपिया डूबा ताल में, पाए कौन निकाल-

गुर्राता डालर खड़ा, लड़ा ठोकता ताल |
रुपिया डूबा ताल में, पाए कौन निकाल |

पाए कौन निकाल, बहे दल-दल में नारा |
मगरमच्छ सरकार, अनैतिक बहती धारा |

घटते यहाँ गरीब, देखिये फिर भी तुर्रा |
पानी में दे ठेल, भैंसिया फिर तू गुर्रा ||
हारे भारत दाँव, सदन हत्थे से उखड़े-
  
 उखड़े मुखड़े पर उड़े, हवा हवाई धूल ।
आग मूतते हैं बड़े, गलत नीति को तूल ।
गलत नीति को तूल, रुपैया सहता जाए । 
डालर रहा डकार, कौन अब लाज बचाए । 
बहरा मोहन मूक, नहीं सुन पाए दुखड़े । 
हारे भारत दाँव, सदन हत्थे से उखड़े ॥ 

गिरता है गिरता रहे, पर पाए ना पार |
रूपया उतना ना गिरे, जितना यह सरकार |

जितना यह सरकार, नरेगा नरक मचाये |
बस पनडुब्बी रेल, मील मिड डे भी खाए |

लेता फ़ाइल लील, सदन में भुक्खड़ फिरता |
मँहगाई में डील, रुपैया नेता गिरता ||
 रोके से ना रोकड़ा, ले रुकने का नाम ।
रुपिया रूप कुरूप हो, मचा रहा कुहराम । 
मचा रहा कुहराम, हुआ अब राम भरोसे । 
मँहगाई की मार, गरीबी जीवन कोसे । 
कह गरीब के साथ, हाथ नित बम्बू ठोके । 
डालर हँसता जाय, रहे पर रुपिया रो के ॥