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Sunday, 30 July 2017

कहो ब्याह का हेतु क्या, दूल्हे से हो प्रश्न-


काया को देगी जला, देगी मति को मार।
क्रोध दबा के मत रखो, यह तो है अंगार।
यह तो है अंगार, क्रोध यदि बाहर आये।
आ जाये सैलाब, और सुख शान्ति बहाये।
कभी किसी पर क्रोध, अगर रविकर को आया।
सिर पर पानी डाल, बदन पूरा महकाया।।


फेरे पूरे हो गये, खत्म हुआ जब जश्न।
कहो ब्याह का हेतु क्या, दूल्हे से हो प्रश्न।
दूल्हे से हो प्रश्न, किया है मस्ती खातिर।
उत्तर सुनकर बोल पड़ी फिर दुल्हन शातिर।
चढ़ जाये जब ढेर, उतारे कौन सवेरे।
इसीलिए तो आज, लगाये मैनै फेरे।।


एक दोहा
डॉक्टर
सख्त जरूरत है तुम्हे, करो आज आराम।
लो गोली देना खिला, बीबी को इस शाम।।


Wednesday, 13 July 2016

मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे-

कैसे थप्पड़ मारता, झूठे को रोबोट।
पेट दर्द के झूठ पे, बच्चा खाये चोट।

बच्चा खाये चोट, कभी मैं भी था बच्चा।
कहा कभी ना झूठ, बाप को पड़ा तमाचा।

मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे।
थप्पड़ वह भी खाय, बताओ रविकर कैसे।।