Saturday, 30 January 2016

रिश्ते तो रिसते रहे, बन बैठे नासूर-

रिश्ते तो रिसते रहे, बने आज नासूर |
स्वार्थ सिद्ध जिनके हुवे, जा बैठे वे दूर |

जा बैठे वे दूर, स्वयं को यूँ समझाया |
वह तो रविकर फर्ज, फर्ज भरपूर निभाया |

परम्परागत कर्ज, चुकाता अब भी किश्तें |
अश्रु-अर्ध्य हर रोज, भूल ना पाता रिश्ते ||

Thursday, 28 January 2016

कभी डाल मत हाथ, अगर रविकर जल खौले

 हौले हौले हादसे, मित्र जाइये भूल। 
ईश्वर की मर्जी चले, करिये इसे कुबूल। 
करिये इसे कुबूल, सावधानी भी रखिये। 
दुर्घटना की मूल, चूक होने पे चखिए। 
कभी डाल मत हाथ, अगर रविकर जल खौले। 
हर गलती से सीख, सीख ले हौले हौले।।

Monday, 25 January 2016

इसीलिए रे मूर्ख, अरे माटी के पुतले-

उबले पानी क्रोध से, उड़े देह से भाप। 
कहाँ वास्तविकता दिखे, केवल व्यर्थ-प्रलाप | 

केवल व्यर्थ-प्रलाप, आग पानी में लागे |
पानी पानी होय, चेतना रविकर जागे। 

इसीलिए रे मूर्ख, अरे माटी के पुतले। 
नहीं उस समय झाँक, जिस समय पानी उबले ||

Friday, 22 January 2016

धरम नहीं आतंक का, किन्तु लाश की जात-

(1)
धरम नहीं आतंक का, किन्तु लाश की जात। 
गाजा पर गर्जना कर, हों सेक्युलर विख्यात। 
हों सेक्युलर विख्यात, जुल्म-कश्मीर नकारें। 
जल्लूकट्टू बंद, किन्तु बकरीद सकारें |
रविकर ये गद्दार, बनाते रहते बौढ़म। 
सत्तासुख की चाह, भोगते रहिये अधरम ||

(2)
चौकस रह, रह बाख़बर, जबर शत्रु की फौज।
खतरा हिंदुस्तान पर, मौज करे कन्नौज।
मौज करे कन्नौज, करेगा फिर गद्दारी।
लेकिन पृथ्वीराज, मरे ना अबकी बारी।
कत्लो-गारद जुल्म, याद आता है बरबस।
नहीं करे फिर माफ़, रहे रविकर अब चौकस।।

(3)
जोड़ी आमिर-किरण सम, डरे करण शहरूख।
इस्लामिक इस्टेट की, ज्यों ज्यों बढ़ती भूख।
ज्यों ज्यों बढ़ती भूख, बचाओ हाफ़िज़ भाई।
बहन फिदाइन भेज, साथ ही चार कसाई।
मिले मदद भरपूर, नहीं तो थोड़ी थोड़ी।
यहीं बहत्तर हूर, यही पर मिले हिजोड़ी।।

Wednesday, 21 January 2015

बनकर रहता ख़ास, धूर्त वह रविकर पूरा -

पूरा जब तक गाँठ का, पूरे तब तक ठाठ |
चंट गाँठ के मित्रता, रहे पढ़ाते पाठ |

रहे पढ़ाते पाठ, करे वह सदा दिखावा |
आया आपद-काल, फुर्र हो उसका दावा |

जब तक पाया लाभ, निभा सम्बन्ध अधूरा |
बनकर रहता ख़ास, धूर्त वह रविकर पूरा || 

Friday, 12 December 2014

ख़ुशी ख़ुशी ख़ुदकुशी कर, खतम खलल खटराग

मर कर पाये मोक्ष तू, बचने पर बेदाग़ |
ख़ुशी ख़ुशी ख़ुदकुशी कर, खतम खलल खटराग | 

खतम खलल खटराग, नहीं अपराध ख़ुदकुशी |
जा झंझट से भाग, असंभव जहाँ वापसी |

जो रविकर कविराय, समस्या से भग जाए |
वह भोगेगा नर्क,  शान्ति ना मरकर पाये || 

Tuesday, 9 September 2014

तुर्क-युवक नादान, बंद कर पत्थरबाजी-

बाजीगर सैनिक डटे, मौत सामने ठाढ़ |
ग्राम नगर कश्मीर के, झेल रहे हैं बाढ़ |

झेल रहे हैं बाढ़, देश राहत पहुँचाया |
फौजी रहे बचाय, सामने जो भी आया |

फ़ौजी का सम्मान, करो रे मुल्ला-काजी |
तुर्क-युवक नादान, बंद कर पत्थरबाजी ||