Monday, 17 October 2011
Sunday, 16 October 2011
पब्लिक दी मरवाय
बोले अकबर देर तक, बँटवारे की बात |
व्याख्यान में खोल के, नेहरु का उत्पात |
नेहरु का उत्पात, सहा हर हिन्दुस्तानी |
जिन्ना पर भी खूब, चढ़ी थी सत्ता-रानी |
दोनों ये अंग्रेज, बने जब सबके रहबर |
पब्लिक दी मरवाय, लड़ा के बोले अकबर |
Saturday, 15 October 2011
कान्ता कर करवा करे, सालो-भर करवाल ||
(शुभकामनाएं)
कर करवल करवा सजा, कर सोलह श्रृंगार |माँ-गौरी आशीष दे, सदा बढ़े शुभ प्यार ||
करवल=काँसा मिली चाँदी
कृष्ण-कार्तिक चौथ की, महिमा अपरम्पार |
क्षमा सहित मन की कहूँ, लागूँ राज- कुमार ||
(हास-परिहास)
कान्ता कर करवा करे, सालो-भर करवाल |
सजी कन्त के वास्ते, बदली-बदली चाल ||
करवाल=तलवार
करवा संग करवालिका, बनी बालिका वीर |
शक्ति पा दुर्गा बनी, मनुवा होय अधीर ||
करवालिका = छोटी गदा / बेलन जैसी भी हो सकती है क्या ?
शुक्ल भाद्रपद चौथ का, झूठा लगा कलंक |
सत्य मानकर के रहें, बेगम सदा सशंक ||
लिया मराठा राज जस, चौथ नहीं पूर्णांश |
चौथी से ही चल रहा, अब क्या लेना चांस ??
(महिमा )
नारीवादी हस्तियाँ, होती क्यूँ नाराज |
गृह-प्रबंधन इक कला, ताके पुन: समाज ||
मर्द कमाए लाख पण, करे प्रबंधन-काज |
घर लागे नारी बिना, डूबा हुआ जहाज ||
मर्द कमाए लाख पण, करे प्रबंधन-काज |
घर लागे नारी बिना, डूबा हुआ जहाज ||
Monday, 10 October 2011
" तटस्थ रहना पाप नहीं "
दिव्य युध्द से अनु - प्रेरित
झगड़ा-झंझट को झटक, झूलन-झगरू चूम |
मध्यस्थी के मर्म में, घोंपे चाक़ू झूम |
घोंपे चाक़ू झूम, रीति है झारखण्ड में -
झगड़े में मत घूम, कटेगा फिरी-फण्ड में |
नक्सल छ: इंच छोटा करेगा
या
पुलिस एंकाउन्टर कर देगी
जीत उसी की होय, बन्धु दम जिसका तगड़ा |
जरा दूर से देख, बड़े मल्लों का झगड़ा ||
वारणीय=निषेध करने योग्य विजल्प=व्यर्थ बात विशिख=वाण
क्यूँ दूर से निरपेक्ष होकर, हाथ करते हो खड़े -
तर्क-संगत टिप्पणी की पाठशाला--
"क्षमा -याचना सहित"
हर लेख को सुन्दर कहा, श्रम को सराहा हृदय से,
अब तर्क-संगत टिप्पणी की पाठशाला ले चलो ||

खूबसूरत शब्द चुन लो, भावना को कूट-कर के
माखन-मलाई में मिलाकर, मधु-मसाला ले चलो |

विज्ञात-विज्ञ विदोष-विदुषी के विशिख-विक्षेप मे |
इस वारणीय विजल्प पर, इक विजय-माला ले चलो | वारणीय=निषेध करने योग्य विजल्प=व्यर्थ बात विशिख=वाण
विदोष-विदुषी= निर्दोष विदुषी विज्ञात-विज्ञ= प्रसिध्द विद्वान
क्यूँ दूर से निरपेक्ष होकर, हाथ करते हो खड़े -
ना आस्तीनों में छुपाओ, तीर - भाला ले चलो ||
टिप्पणी के गुण सिखाये, आपका अनुभव सखे,
चार-छ: लिख कर के चुन लो, मस्त वाला ले चलो ||
चार-छ: लिख कर के चुन लो, मस्त वाला ले चलो ||
लेखनी-जिभ्या जहर से जेब में रख लो, बुझा कर -
हल्की सफेदी तुम चढ़ाकर, हृदय-काला ले चलो |
टिप्पणी जय-जय करे, इक लेख पर दो बार हरदम-
कविता अगर 'रविकर' रचे तो, संग-ताला ले चलो |
जीवमातृका पञ्च कन्या तो बचा ||
जीवमातृका वन्दना, माता के सम पाल |
जीवमंदिरों को सुगढ़, करती सदा संभाल ||
शिव और जीवमातृका
धनदा नन्दा मंगला, मातु कुमारी रूप |
बिमला पद्मा वला सी, महिमा अमिट-अनूप ||

भ्रूण-हत्या
माता करिए तो कृपा, सातों में से एक |
भ्रूणध्नी माता-पिता, देते असमय फेंक ||
भ्रूण-हत्या
कुन्ती तारा द्रौपदी, लेशमात्र न रंच |
आहिल्या-मन्दोदरी , मिटती कन्या-पञ्च |
पन्च-कन्या
सातों माता भी नहीं, बचा सकी गर पाँच |
सबकी महिमा पर पड़े, मातु दुर्धर्ष आँच |
Monday, 3 October 2011
सुपुत्री मनु को जन्मदिन की बधाई : 4 अक्टूबर
लड़का-लड़की में भले, भेद हैं करते कस ?
आश्विन की तिथि पञ्चमी, रहा नवासी वर्ष,
बहन शिवा की आ गई, हर्ष चरम उत्कर्ष |
हर्ष चरम उत्कर्ष, शीघ्र ही लगी डोलने,
ताला - चाभी फर्श, पेटिका लगी खोलने |
कह रविकर हरसाय, ख़ुशी से बीते हरदिन,
माता की नवरात, मास फलदायक आश्विन ||
भाई के संग में शुरू , किया पढाई कर्म |
सीखे थोड़ी देर से, पर भूले न मर्म |
पर भूले न मर्म, शिवा को टक्कर देती |
सीखी बाइक कार, कदम न पीछे लेती |
स्वस्ति-मेधा बहन, सिखा के खुब हरसाई |
प्यार हृदय में गहन, शिवा सा पाई भाई ||
राष्ट्रीय संस्थान में, भाई इलहाबाद,
जीवन में पहली दफा, था गहरा अवसाद |
था गहरा अवसाद, पीलिया को भी झेली ,
मैं एडमिट वेलूर, साल इक पढ़ी अकेली |
माँ का पा आशीष, किया श्रम इम्तिहान में,
Swasti- Medha, Rachna Sharma, Rupal Srivastava
at BIET, Jhansi
at BIET, Jhansi
- भाई टी सी आय एल, बहन है टी सी यस |
- लड़का-लड़की में भले, भेद हैं करते कस ?
- भेद हैं करते कस, साथ खूब क्रिकेट खेली |
- भाई की है दोस्त, बहन की बड़ी सहेली |
- मात-पिता हम देत, खूब आशीष बधाई |
- स्वस्ति-मेधा बहन, शिवा सा प्यारा भाई ||
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Wednesday, 28 September 2011
लीज छीज खा खनिज-
फूटी आँखें जीव की, तम भी नहीं दिखाय |
तमसो मा ज्योति गया, चकाचौंध अतिकाय |
चकाचौंध अतिकाय, भोगते रेड्डी - कोड़ा |
लीज छीज खा खनिज, करोड़ों जोड़ा - तोड़ा |
पर रविकर पड़ जाय, तमन्चर अधिक उजाला |
आँखे जाती फूट, बदन पड़ जाता काला ||
तमन्चर=निशाचर, राक्षस, उल्लू
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