Sunday, 28 August 2011
Friday, 29 July 2011
दर्द की तुकबंदी
लीजिये भुगत |
कीजिये जुगत ||
हो गया इश्क
बेहूदी लत |
याद आये
तेरी सोहबत ||
फिर तडपाये
होती दुर्गत |
टपकी बूंद -
मानसूनी छत ||
जल में मछली
तडपत-तडपत ||
जल में मछली
तडपत-तडपत ||
चढ़कर बोली
मस्तक मस्तक |
बिना बुलाये
आई आफत |
मीठा लड्डू
कडुवी नेमत |
धत तेरे की
अपनी किस्मत ||
बुरी बला ये
शोखी-हरकत |
फिर न होवे जालिम गफलत ||
Monday, 18 July 2011
स्लीपर-सेल : घनाक्षरी
शक्ल सूरत एक सी, हाथ पैर एक जैसे
नाक कान आँख मुंह, एक से दिखात हैं |
भीड़ - भाड़ हाट चौक, घर द्वार रेस्टोरेंट
आस पास सोये पड़े, बड़े इफरात हैं |
कठपुतली बन के , विभीषण से तनके
यहाँ वहाँ चाहे जहाँ , थैला पहुँचात हैं |
दस - बीस मारकर, भीड़ बीच घुस जात,
आतंकी स्लीपर सेल, यही तो कहात हैं ||
और अंत में एक दोहा,
उम्मीद का--
चर्चित चेहरे देश के, करते है उम्मीद |
आज मुहर्रम हो गई, कल होवेगी ईद ||
चिदंबरम उवाच !
इकतिस महिना न हुआ, माँ मुम्बा विस्फोट |
तीन फटे तेइस मरे, व्यर्थ निकाले खोट ||
जनता पूछे--
उम्मीद का--
चर्चित चेहरे देश के, करते है उम्मीद |
आज मुहर्रम हो गई, कल होवेगी ईद ||
चिदंबरम उवाच !
इकतिस महिना न हुआ, माँ मुम्बा विस्फोट |
तीन फटे तेइस मरे, व्यर्थ निकाले खोट ||
जनता पूछे--
जनता पूछे देश में, कितने महिने और |
गृह-मंत्री जी बोलिए, मिलिहै हमका ठौर ||
गृह-मंत्री जी बोलिए, मिलिहै हमका ठौर ||
Sunday, 17 July 2011
जनता पूछे देश में, कितने महिने और |
B J P : पान का बीड़ा
रखी रकाबी में रकम, पनबट्टी के साथ |
दिग्गी जस जो दोगला, वही लगावे हाथ || रखी रकाबी में रकम, पनबट्टी के साथ |
राहुल की राह-गुल --
कई देश में रात दिन, होते बम-विस्फोट |
एक बार की चोट से, देगा क्यूँ न वोट ||
पृथ्वी बोले
एक बार की चोट से, देगा क्यूँ न वोट ||
पृथ्वी बोले
पृथ्वी बोले मै नहीं, गोरी का ही दोष |
मोनी-सोनी घूमते, करे व्यक्त अफ़सोस ||
चिदंबरम उवाच !मोनी-सोनी घूमते, करे व्यक्त अफ़सोस ||
इकतिस महिना न हुआ, माँ मुम्बा विस्फोट |
तीन फटे तेइस मरे, व्यर्थ निकाले खोट ||
जनता पूछे--
जनता पूछे देश में, कितने महिने और |
गृह-मंत्री जी बोलिए, मिलिहै हमका ठौर ||
गृह-मंत्री जी बोलिए, मिलिहै हमका ठौर ||
Saturday, 16 July 2011
कह विलास जी राव, वेंगसरकर क्या खाकर,
कृषक,खिलाड़ी चोर, बोर्ड का लेखा-जोखा,
करता चोखा काम, कहीं न होवे धोखा |
कह विलास जी राव, वेंगसरकर क्या खाकर,
करे मुकाबला मोर, विकेट अपना उडवाकर |
Friday, 15 July 2011
सरकार
तरह तरह के किरदारों से
सजे- हमारे ये बेहूदे |
कुछ भी नहीं है बस में इनके,
कुछ भी नहीं है बस में इनके,
व्यर्थ भूमि पर झूरै कूदे ||
बड़ा भलामानस बनता है,
सच्चाई का झूठा पुतला,
चरण वंदना सोनी मैया,
चरण वंदना सोनी मैया,
करे हमेशा आँखे मूंदे ||
कल बापू ने कहा था--
जन-साधारण की करो, सेवा ये सन्देश ,
नर ही तो नारायना, धर कर आते वेश |
धर कर आते वेश, सफाई घर की रखना,
रोग रहेंगे दूर, मजे जीवन के चखना |
मंदिर को भी साफ, रखो ऐ मेरे भाई
प्रभु को लागै नीक, हमेशा खूब सफाई ||
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