Sunday, 28 August 2011

अग्नि वेश धरे शिखंडी-वेश

war 

स्वामी फिर पकड़ा गया, धरे शिखंडी-वेश,
सिब्बल  के  षड्यंत्र से, धोखा खाता देश,

http://www.firstpost.com/wp-content/uploads/2011/08/agnivesh-reuters1.jpg
 

धोखा खाता देश, वस्त्र भगवा का दुश्मन,
टीमन्ना  से द्वेष, कराता उनमे अनबन,



http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/7/7b/Donkey_1_arp_750px.jpg
 

अग्नि का उद्देश्य, पकाता अपनी खिचड़ी,
 है धरती पर बोझ, बुनाये जाला-मकड़ी ||

Friday, 29 July 2011

दर्द की तुकबंदी

लीजिये भुगत |
कीजिये जुगत ||
हो गया इश्क
बेहूदी   लत |

याद  आये
तेरी सोहबत  ||
फिर तडपाये
होती  दुर्गत |

टपकी बूंद -
मानसूनी छत ||
जल में मछली 
तडपत-तडपत ||

चढ़कर बोली 
मस्तक मस्तक |
बिना बुलाये 
आई आफत |


मीठा लड्डू
कडुवी नेमत |

धत तेरे की
अपनी किस्मत ||

बुरी बला ये
शोखी-हरकत |
फिर न होवे
जालिम गफलत ||

 

Monday, 18 July 2011

स्लीपर-सेल : घनाक्षरी

शक्ल  सूरत  एक  सी, हाथ  पैर  एक  जैसे
नाक  कान  आँख  मुंह, एक  से  दिखात हैं |

भीड़ - भाड़  हाट  चौक,  घर  द्वार  रेस्टोरेंट
आस   पास   सोये  पड़े,  बड़े   इफरात   हैं |

कठपुतली   बन  के ,  विभीषण  से  तनके 
यहाँ  वहाँ  चाहे  जहाँ , थैला   पहुँचात   हैं |

दस - बीस  मारकर,  भीड़  बीच  घुस  जात,
आतंकी  स्लीपर  सेल,  यही  तो   कहात  हैं ||


और अंत में एक दोहा,
उम्मीद का--

चर्चित चेहरे देश के, करते है उम्मीद |
आज मुहर्रम हो गई, कल होवेगी ईद ||


चिदंबरम उवाच !
 इकतिस महिना न हुआ, माँ मुम्बा विस्फोट |
 तीन  फटे  तेइस  मरे,  व्यर्थ  निकाले  खोट ||

 जनता  पूछे--
 जनता  पूछे देश  में, कितने महिने और |
गृह-मंत्री जी बोलिए, मिलिहै हमका ठौर ||


Sunday, 17 July 2011

जनता पूछे देश में, कितने महिने और |

 B J P : पान का बीड़ा
रखी रकाबी में  रकम, पनबट्टी के  साथ |
दिग्गी जस जो दोगला, वही  लगावे  हाथ || 
राहुल की राह-गुल -- 
कई देश में रात दिन, होते बम-विस्फोट |
एक बार की चोट से,  देगा क्यूँ  न वोट ||

पृथ्वी  बोले
पृथ्वी  बोले  मै  नहीं, गोरी  का  ही दोष |
मोनी-सोनी घूमते, करे व्यक्त अफ़सोस ||
चिदंबरम उवाच !
 इकतिस महिना न हुआ, माँ मुम्बा विस्फोट |
 तीन  फटे  तेइस  मरे,  व्यर्थ  निकाले  खोट ||

 जनता  पूछे--
 जनता  पूछे देश  में, कितने महिने और |
गृह-मंत्री जी बोलिए, मिलिहै हमका ठौर ||

Saturday, 16 July 2011

कह विलास जी राव, वेंगसरकर क्या खाकर,

भड़ास   पर

बड़-पावर  है  शरद  का, कहाँ खिलाड़ी जोर
सबसे बड़ ये विश्व का, कृषक,खिलाड़ी, चोर |

कृषक,खिलाड़ी चोर, बोर्ड  का लेखा-जोखा,
करता  चोखा काम,  कहीं  न  होवे  धोखा  |

कह विलास जी राव, वेंगसरकर क्या खाकर,
करे मुकाबला मोर, विकेट अपना उडवाकर |

Friday, 15 July 2011

सरकार

तरह   तरह   के  किरदारों  से 
सजे- हमारे   ये  बेहूदे |
कुछ भी नहीं है बस में इनके, 
व्यर्थ भूमि पर झूरै कूदे ||

बड़ा भलामानस बनता है, 
सच्चाई   का  झूठा   पुतला,
चरण   वंदना   सोनी   मैया, 
करे   हमेशा  आँखे   मूंदे ||

कल बापू ने कहा था--

जन-साधारण की करो, सेवा  ये सन्देश ,
नर ही तो नारायना,  धर कर आते वेश |

धर कर आते वेश, सफाई घर की रखना,
रोग रहेंगे दूर,    मजे  जीवन  के चखना |

मंदिर को भी साफ,  रखो  ऐ  मेरे  भाई
प्रभु को लागै नीक,  हमेशा खूब  सफाई ||