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Tuesday, 6 September 2016

बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा


1)
कृष्णा तेरी कृपा की, सदा रही दरकार।
दर दर मैं भटकूँ नहीं, बस गोकुल से प्यार।
बस गोकुल से प्यार, हृदय में श्याम विराजा।
बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा।
राधे राधे बोल, जगत से हुई वितृष्णा।
प्रेम तनिक ले तोल, बैठ पलड़े पे कृष्णा।।
2)
बाधाएँ हरते रहे, भक्तों की नित श्याम।
कुपित इंद्र वर्षा करें, गोकुल पर अविराम।
गोकुल पर अविराम, समस्या कैसे टालें।
गोवर्धन को श्याम, तभी चुपचाप उठा लें।
कंगुरिया वह वाम, और वामांगी राधा।
करती मदद परोक्ष, हरे गोकुल की बाधा।।

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