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Sunday, 25 September 2016

हनुमत रविकर ईष्ट, उन्हें क्यों नही पुकारा


पंडित का सिक्का गिरा, देने लगा अजान।
गहरा नाला क्यूं खुदा, खुदा करो अहसान ।
खुदा करो अहसान, सन्न हो दर्शक सारा
हनुमत रविकर ईष्ट, उन्हें क्यों नही पुकारा ।
इक सिक्के के लिए, करूं क्यों भक्ति विखंडित।
क्यूं कूदें हनुमान, प्रत्युत्तर देता पंडित।।

Tuesday, 6 September 2016

बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा


1)
कृष्णा तेरी कृपा की, सदा रही दरकार।
दर दर मैं भटकूँ नहीं, बस गोकुल से प्यार।
बस गोकुल से प्यार, हृदय में श्याम विराजा।
बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा।
राधे राधे बोल, जगत से हुई वितृष्णा।
प्रेम तनिक ले तोल, बैठ पलड़े पे कृष्णा।।
2)
बाधाएँ हरते रहे, भक्तों की नित श्याम।
कुपित इंद्र वर्षा करें, गोकुल पर अविराम।
गोकुल पर अविराम, समस्या कैसे टालें।
गोवर्धन को श्याम, तभी चुपचाप उठा लें।
कंगुरिया वह वाम, और वामांगी राधा।
करती मदद परोक्ष, हरे गोकुल की बाधा।।

Thursday, 28 July 2016

रखे बुद्धि पर किन्तु, बचा जो पत्थर पहले-

पहले तो करते रहे, अब होती तकलीफ।
बेगम बोली क्यों नहीं, मियां करे तारीफ।
मियां करे तारीफ, संगमरमर सी काया।
पत्थर एक तराश, प्रभू! क्या खूब बनाया।
चला फूँकने प्राण, किन्तु कर बाल सुनहले।
था पत्थर जो शेष, अक्ल पर रख दे पहले।

Monday, 25 July 2016

दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी -


उदासीनता की तरफ, बढ़ते जाते पैर ।
रोको रविकर रोक लो, जीवन से क्या बैर । 
जीवन से क्या बैर, व्यर्थ ही जीवन त्यागा ।
कर अपनों को गैर, अभागा जग से भागा |
दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी ।
जीवन के सब तत्व, जियो जग छोड़ उदासी ।।

रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता

जल के जल रक्षा करे, जले नहीं तब दुग्ध।
गिरे अग्नि पर उबलकर, दुग्ध कर रहा मुग्ध।
दुग्ध कर रहा मुग्ध, मूल्य जल का बढ़ जाता।
रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता।
आई बीच खटास, दूध फट जाय उबल के।
जल भी मिटता जाय, आग पर रविकर जल के।।

Monday, 18 July 2016

नीति-नियम-आदर्श, हवा के ताजे झोंके

प्रश्नों के उत्तर कठिन, नहीं आ रहे याद |

स्वार्थ-सिद्ध मद-मोह-सुख, भोगवाद-उन्माद |

भोगवाद-उन्माद , नशे में बहके बहके |

लेते रहते स्वाद, अनैतिक चीजें गहके |

नीति-नियम-आदर्श, हवा के ताजे झोंके |

चौथेपन में आज, लिखूँ उत्तर प्रश्नों के ||

Wednesday, 13 July 2016

मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे-

कैसे थप्पड़ मारता, झूठे को रोबोट।
पेट दर्द के झूठ पे, बच्चा खाये चोट।

बच्चा खाये चोट, कभी मैं भी था बच्चा।
कहा कभी ना झूठ, बाप को पड़ा तमाचा।

मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे।
थप्पड़ वह भी खाय, बताओ रविकर कैसे।।