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Wednesday, 21 August 2013

करवा लेती काम, फाइलें चाटे दीमक-

दीमक मजदूरी करे, चाट चाट अविराम |
रानी महलों में फिरे, करे क़ुबूल सलाम |

करे क़ुबूल सलाम, कोयला काला खलता |
बचती फिर भी राख, लाल होकर जो जलता |

लेकिन रानी तेज, और वह पूरा अहमक |
करवा लेती काम, फाइलें चाटे दीमक ||

11 comments:

  1. बहुत सटीक और सुंदर.

    रामराम.

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  2. आप ने लिखा... हमने पढ़ा... और भी पढ़ें... इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 23-08-2013 की http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस हलचल में शामिल रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी दें...
    और आप के अनुमोल सुझावों का स्वागत है...




    कुलदीप ठाकुर [मन का मंथन]

    कविता मंच... हम सब का मंच...

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  3. सटीक लेखन , शुभकामनाये रविकर भाई

    यहाँ भी पधारे
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/08/blog-post_6131.html

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज वृहस्पतिवार (22-06-2013) के "संक्षिप्त चर्चा - श्राप काव्य चोरों को" (चर्चा मंचः अंक-1345)
    पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. दीमक और आग कितनी जरूरी है, ये अब ही पता चला.

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  6. लेकिन रानी तेज, और वह पूरा अहमक |
    करवा लेती काम, फाइलें चाटे दीमक ||

    प्रजा तंत्र अब चाटे दीमक

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

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  8. हा हा बहुत सटीक............

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  9. सार्थक प्रस्तुति. कमाल

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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