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Thursday, 15 December 2011

कान उमेठें गुरू जी--

शिशु-बाल  
A childhood photograph of Nguyen Tuong Van.
हँसना रोना छींकना, दुख सुख की अनुभूति |
करे तेज बल बुद्धि की, दैनंदिन आपूर्ति ||

Los Angeles Child Photography
तगड़ा होता फेफड़ा,  रोता  है तो रोय । 
बच्चे को मत रोकिये, स्वत: शीघ्र चुप होय  ||
Child Crying - IMG_1854.jpg
आँसू  बहने  दो जरा, भावों  को  मत  रोक  |
निर्मल होते दिल नयन, कम हो जाता शोक ||
Shock
कान  उमेठें  गुरू  जी, मुख से निकली आह |
बुद्धि तीक्ष्ण होती समझ,  भरते ज्ञान अथाह ||
 
गिरने से छिल जाय जब,  नरम -मुलायम खाल |
शांत चित्त हो देखिये, हृष्ट-पुष्ट हो बाल ||
 

एकाकी बालक नहीं,  सह पाता अवसाद |
हारे-जीते झुण्ड  में, जाने दुःख -उन्माद ||

13 comments:

  1. बाल अभिव्यक्ति की विधायें हैं ये।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आप कहें तो नीम-निम्बोरी का बढ़िया हैडर आपके लिए बना सकता हूँ!

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  3. interesting and innovative...lovely couplets..

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  4. सुंदर बालमन की अभिव्यक्तियाँ.....

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  5. beautiful active knowledge to save child knowledge.

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  6. सुंदर चित्रों के साथ बालपन की सुंदर प्रस्तुति,...बढ़िया पोस्ट

    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

    आफिस में क्लर्क का, व्यापार में संपर्क का.
    जीवन में वर्क का, रेखाओं में कर्क का,
    कवि में बिहारी का, कथा में तिवारी का,
    सभा में दरवारी का,भोजन में तरकारी का.
    महत्व है,...

    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  7. बहुत रोचक और उपयोगी प्रस्तुति...

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  8. गिरने से छिल जाय जब, नरम -मुलायम खाल |
    शांत चित्त सब देखिये, करिए नहीं बवाल ||
    नीति परक बाल मनोविज्ञान की बूझ से संसिक्त सूत्रात्मक दोहे .बेहतरीन अंदाज़ .

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  9. बहुत ही अच्‍छी भावमय शब्‍द रचना ।

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  10. बहुत बढिया प्रस्तुति,मनभावन सुंदर अभिव्यक्ति ......
    WELCOME to--जिन्दगीं--

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