जिभ्या के बकवाद से, भड़के सारे दाँत |
मँहगाई हो बेलगाम, छोटी करती आँत ||
आँखे ताकें रोटियां, जीभी पूछे जात |
दाँतो में दंगा हुआ, टूटी दायीं पाँत ||
मतनी कोदौं खाय के, माथा घूमें जोर |
बेहोशी में जो पड़े, चल उनको झकझोर ||
हाथों के सन्ताप से, बिगड़ गए शुभ काम |
मजदूरी भारी पड़ी, पड़े चुकाने दाम ||
पाँव भटकने लग पड़े, रोजी में भटकाव |