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Monday, 30 May 2016

करें कदर कद देख के, कदरदान नादान


करें कदर कद देख के, कदरदान नादान |
करता ऊँची एड़ियां, इसीलिए इन्सान |
इसीलिए इन्सान, एड़ियां घिसती जाएँ |
पीढ़ा तो वरदान, किसी का लेकर आएँ |
जिसपे रखकर पैर, खड़ा हो जाऊं तनकर |
प्राप्त करूँ फिर लक्ष्य, यही अभिलाषा रविकर ||

4 comments:

  1. नादान या चतुर ? :)

    बढ़िया ।

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  2. सुन्दर अभिलाषा ... सुन्दर छंद का आनद आलोकिक है ...

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  3. बहुत सुन्दर नेक अभिलाषा ...

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