Wednesday, 8 February 2012
दुनिया देखे और, युवी का छह-छह छक्का-
छक्का छः मारे गजब, बड़ी 'आर्म-स्ट्राँग'।
छक के खाया दूध घी, माता से खुब माँग ।
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माता से खुब माँग, कैन्सर भी हारेगा ।
फिर से कुल मैदान, खेल के तू मारेगा ।
यह शबनम का पूत, करे फिर हक्का-बक्का ।
दुनिया देखे और, युवी का छह-छह छक्का ।।
Friday, 3 February 2012
वेलेन्टाइन डेट--
गाड़ी छुक-छुक चल रही, तेइस घंटे लेट ।
चौदह को निश्चित करे,
वेलेन्टाइन डेट
।
वेले
न्टा
इन
डेट, बैठिये
वेले
नाहीं ।
लव-
आईन
का बन्ध, देखिए प्रेम-सुराही ।
आँट-साँटकर पोट, खेल कर प्रेम-खिलाड़ी।
गत नाड़ी की तेज, चले-छुक छुकछुक-गाड़ी ।।
Friday, 27 January 2012
मेरी टिप्पणी
बेसुरम पर -
-
बाप रे! फिर चुनाव!!
ढोता बोझा तंत्र का, मन्त्र एक मतदान |
सरकारी खच्चर पड़ा, इत-उत ताक उतान |
इत-उत ताक उतान, बोझ से मन घबराया |
हिम्मत कर पुरजोर, तंत्र का बोझ उठाया |
बोले पर गणतंत्र, उठा के क्यूँ तू रोता |
प्रभू उठाये तोय, उठाये जैसे ढोता ||
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