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Friday, 6 April 2012

पिता, पुत्र पति में बही व्यर्थ समय की रेत-

veerubhai at ram ram bhai

पर मेरी टिप्पणी

अधिकारों के प्रति रहे, 
मुखरित और सचेत |
पिता, पुत्र पति में बही 
व्यर्थ समय की रेत |

व्यर्थ समय की रेत 
बराबर हक़ पायी है |
आजादी के गीत, 
जोर से अब गायी है |

चाल-ढाल ड्रेस वाद, 
थोपिए अब न इनपर |
माँ क्या जाने आज, 
नारियां चलती तनकर ||

1 comment:

  1. सब आगे बढ़ीं जा रहीं हैं।

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