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Monday, 14 July 2014

साधे रविकर स्वार्थ, बंद ना करे सताना -

ताना-बाना बिगड़ता, ताना मारे तन्त्र । 
भाग्य नहीं पर सँवरता,  फूंकें लाखों मन्त्र । 

फूंकें लाखों मन्त्र, नीयत में खोट हमारे । 
खुद को मान स्वतंत्र, निरंकुश होते सारे । 

साधे रविकर स्वार्थ, बंद ना करे सताना । 
कुल उपाय बेकार, नए कुछ और बताना ॥ 

6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना मंगलवार 15 जुलाई 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. उपाय तो वही हैं जो आपने बताये हैं..पर उन्हें पालन तो करना पड़ेगा

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  3. बहुत बढ़िया

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