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Saturday, 18 February 2017

हास्य-व्यंग्य सुंदर विधा, रचे प्रभावी छंद


इंसानी छलछंद को, करते अक्सर मंद।
हास्य-व्यंग्य सुंदर विधा, रचे प्रभावी छंद।
रचे प्रभावी छंद, खोट पर चोट करे है।
प्रवचन कीर्तन सूक्ति, भजन संदेश भरें हैं।
सुने-गुने धर-ध्यान, नहीं है रविकर सानी।
किन्तु दृष्टिगत भेद, दिखे फितरत इंसानी।।

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंलवार (21-02-2017) को
    सो जा चादर तान के, रविकर दिया जवाब; (चर्चामंच 2596)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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