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Thursday, 6 March 2014

भूले भ्रष्टाचार, भूल जाते मँहगाई-

बातें करते हवा से, हवा हुई सरकार |
हवा-हवाई घोषणा, भूले भ्रष्टाचार |

भूले भ्रष्टाचार, भूल जाते मँहगाई |
करने लगे प्रचार, उन्हीं सेक्युलर की नाई |

पानी पी पी कोस, होंय खुश कई जमातें |
देखो अपने दोष, बनाओ यूँ ना बातें ||

दोहा 

धरना देने जो गए, आव रही ना ताव |

टोपी धरना जेब में, डूब रही है नाव ||

8 comments:

  1. बेहतरीन प्रस्तुति

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  2. मंगलकामनाएं होली की स्वीकार करें !
    कविवर मन ही मन आदर स्वीकार करें !

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  3. सुन्दर मनोहर !

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  4. बहुत सुन्दर ..आज कल आप कम सक्रिय हैं ..

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