Monday, 24 October 2016
किन्तु मार के लात, रुलाती अब औलादें-
लादें औलादें सतत, मातायें नौ माह।
लात मारती पेट में, फिर भी हर्ष अथाह।
फिर भी हर्ष अथाह, पुत्र अब पढ़ने जाये।
पेट काट के बाप, उसे नौकरी दिलाये।
पुन: वही हालात, बची हैं केवल यादें।
किन्तु मार के लात, रुलाती अब औलादें।।
Friday, 7 October 2016
बहू खोजता रोज, कुंवारा बैठा पोता
पोता जब पैदा हुआ, बजा नफीरी ढोल ।
नतिनी से नफरत दिखे, दिखी सोच में झोल।
दिखी सोच में झोल, परीक्षण पूर्ण कराया |
नहीं कांपता हाथ, पेट पापी गिरवाया ।
कह रविकर कविराय, बैठ के बाबा रोता |
बहू खोजता रोज, कुंवारा बैठा पोता ।।
Sunday, 25 September 2016
हनुमत रविकर ईष्ट, उन्हें क्यों नही पुकारा
पंडित का सिक्का गिरा, देने लगा अजान।
गहरा नाला क्यूं खुदा, खुदा करो अहसान ।
खुदा करो अहसान, सन्न हो दर्शक सारा
हनुमत रविकर ईष्ट, उन्हें क्यों नही पुकारा ।
इक सिक्के के लिए, करूं क्यों भक्ति विखंडित।
क्यूं कूदें हनुमान, प्रत्युत्तर देता पंडित।।
Tuesday, 6 September 2016
बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा
1)
कृष्णा तेरी कृपा की, सदा रही दरकार।
दर दर मैं भटकूँ नहीं, बस गोकुल से प्यार।
बस गोकुल से प्यार, हृदय में श्याम विराजा।
बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा।
राधे राधे बोल, जगत से हुई वितृष्णा।
प्रेम तनिक ले तोल, बैठ पलड़े पे कृष्णा।।
2)
बाधाएँ हरते रहे, भक्तों की नित श्याम।
कुपित इंद्र वर्षा करें, गोकुल पर अविराम।
गोकुल पर अविराम, समस्या कैसे टालें।
गोवर्धन को श्याम, तभी चुपचाप उठा लें।
कंगुरिया वह वाम, और वामांगी राधा।
करती मदद परोक्ष, हरे गोकुल की बाधा।।
Thursday, 28 July 2016
रखे बुद्धि पर किन्तु, बचा जो पत्थर पहले-
पहले तो करते रहे, अब होती तकलीफ।
बेगम बोली क्यों नहीं, मियां करे तारीफ।
मियां करे तारीफ, संगमरमर सी काया।
पत्थर एक तराश, प्रभू! क्या खूब बनाया।
चला फूँकने प्राण, किन्तु कर बाल सुनहले।
था पत्थर जो शेष, अक्ल पर रख दे पहले।
Monday, 25 July 2016
दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी -
उदासीनता की तरफ, बढ़ते जाते पैर ।
रोको रविकर रोक लो, जीवन से क्या बैर ।
जीवन से क्या बैर, व्यर्थ ही जीवन त्यागा ।
कर अपनों को गैर, अभागा जग से भागा |
दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी ।
जीवन के सब तत्व, जियो जग छोड़ उदासी ।।
रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता
जल के जल रक्षा करे, जले नहीं तब दुग्ध।
गिरे अग्नि पर उबलकर, दुग्ध कर रहा मुग्ध।
दुग्ध कर रहा मुग्ध, मूल्य जल का बढ़ जाता।
रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता।
आई बीच खटास, दूध फट जाय उबल के।
जल भी मिटता जाय, आग पर रविकर जल के।।
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