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Wednesday, 8 January 2014

रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ -

कुछ पॉलिटिकल  
(१)
आओ जब मैदान में, समझ बूझ हालात |
मजे मजे मजमा जमे, जमघट जबर जमात |
जमघट जबर जमात, आप करिये तैयारी |
क़ाबलियत कर सिद्ध,  निभाओ जिम्मेदारी |
रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ |
अहंकार व्यवहार, बाज बड़बोले आओ ||

(२)
बहना बह ना भाव में, हवा बहे प्रतिकूल |
दिग्गज अपने दाँव में, दिखे झोंकते धूल |
दिखे झोंकते धूल, आँख में भरकर पानी |
तोड़े कई उसूल, किये अब तक मनमानी |
ले राहुल आलम्ब, सदा सत्ता में रहना |
दिखलाते नित दम्भ, संभलना छोटी बहना -

3 comments:

  1. आपकी प्रस्तुति गुरुवार को चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है |
    आभार

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