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Wednesday, 3 April 2013

मुदित-मुदिर मुद्रा मटक, मुद्रा मुफ्त कमाय -

 आभार आदरणीय अरुण निगम जी-
मुदित-मुदिर मुद्रा मटक, मुद्रा मुफ्त कमाय । 
जिला रही नश्वर बदन, जिला-जवाँर घुमाय । 
यमक अलंकार मुद्रा / जिला 

जिला-जवाँर घुमाय, जवानी के जलवे हैं । 
रूपाजीवा हाय, हुवे दंगे बलवे हैं । 

मरे हजारों लोग, लांछना लेकिन अनुचित । 
रविकर मरता जाय, मगन मन झांके प्रमुदित । । 
मुदिर=कामुक 
रूपाजीवा = वेश्या 

6 comments:

  1. Replies
    1. बाई दी वे, होली से कब लौटे सर जी आप ?:)

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  2. बेहतरीन,आभार.ब्लॉग जगत को आपकी कमी खलती थी.

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