अपने बारे में अगर, खुद ही सोचें राम ।
बेढब दुनिया क्या करे, मुँह ढांपे आराम ।
मुँह ढांपे आराम, काम बढ़िया कर जाओ ।
रोया था तू आय, जाय के इन्हें रुलाओ ।
कर मानव-कल्याण, पूर कर पावन सपने ।
छोडो देना ध्यान, भटक ना जाओ अपने ।।

अश्वस्थामा हस्ति की, हस्ती देत मिटाय ।
