Sunday, 15 April 2012

संजय भास्कर जी की शुभ रात्रि के सुभाषित पर--

 अपने बारे में अगर, खुद ही सोचें राम ।
बेढब दुनिया क्या करे, मुँह ढांपे आराम । 

मुँह ढांपे आराम, काम बढ़िया कर जाओ ।
रोया था तू आय, जाय के इन्हें रुलाओ ।

कर मानव-कल्याण, पूर कर पावन सपने ।
छोडो देना ध्यान, भटक ना जाओ अपने ।।

Friday, 13 April 2012

वह कसाब अब कृष्ण, बाप दो-दो जो पाया -

खाया छप्पन जान खुद, मेहमान शैतान ।
सत्ता हिन्दुस्तान की, लगती पाक समान ।

 
लगती पाक समान
, जनक इक इसे जन्मता ।
पालनकर्ता जनक, दिखाता बड़ी नम्रता ।


 
वह कसाब अब कृष्ण, बाप दो-दो जो पाया ।
छप्पन भोग लगाय, अभी भी नहीं अघाया  ।। 

Thursday, 12 April 2012

बन्दे कुछ चालाक, गधे से हल चलवाते -

सीधा साधा सौम्य सा . काँखा- कूँखा नाय ।
नमक-रुई की बोरियां, चतुराई विसराय ।

चतुराई विसराय, नई संतति  है  आई  |
गबरगण्ड गमखोर, गधे को मिले बधाई ।

बन्दे कुछ चालाक, गधे से हल चलवाते ।
रविकर मौका देख, गधे को बाप बनाते ।। 


 

Wednesday, 11 April 2012

करके कारक पक्ष, झूठ करता है बम-बम -

(१)
Bhima kills Ashwathama the elephantअश्वस्थामा हस्ति की, हस्ती देत मिटाय ।
जीव-जंतु मरते गए, शामिल धर्म चुपाय ।
शामिल धर्म चुपाय,  द्रोण की हत्या होती ।
यह युक्ति-निर्दोष,  बीज हत्या की बोती ।
पाँचो पांडव पुत्र, कटे मिटता कुल-नामा ।
मणि विहीन ले घाव, भटकता अश्वस्थामा ।




(२)
Picture

पर्यावरण परिस्थिती, दे झूठों का साथ ।
चिरंजीव की मृत्यु सुन, घूम द्रोण का माथ ।


घूम द्रोण का माथ, मरे ना अश्वस्थामा ।
पर करते विश्वास, बिधाता होते बामा ।

ऐसे शाश्वत सत्य,  हारता जाए हरदम । 
करके कारक पक्ष, झूठ करता है बम-बम ।।

  

Monday, 9 April 2012

Sunday, 8 April 2012

रविकर कैसी लाश, समझती सब कुछ सुल्टा-

उल्टा-पुल्टा कर रही, मौत साल दर साल ।
जीवन को तो खा चुकी, खूब बजावे गाल ।

खूब बजावे गाल, धूप में दाल गलावे ।

 समय-पौध जंजाल, माल-मदिरा उपजावे ।

रविकर कैसी लाश, समझती सब कुछ सुल्टा ।

पर पट्टा दुहराय, मौत को ढोती उल्टा ।।  

Saturday, 7 April 2012

नहीं देखते दोष, स्वार्थ में रविकर अंधे-

अंधे का क्या दोष है, दुनिया नहीं दिखाय ।
मन के नैनो से लखे, गाए खाय-कमाय ।।


गाए खाय-कमाय, काम में अंधा  मानव।
देखे विना विवेक, बने तत्क्षण ही दानव ।


दिखे न कोई श्रेष्ठ, करें मद-गोरख-धंधे ।
नहीं देखते दोष, स्वार्थ में रविकर अंधे ।।  


Sports Illustrated: In 2001, Erik became the first blind man to climb Mt.Everest.