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Sunday, 4 September 2011

मीरा रही जगाय--


Photo: Dusk descends on a herd of buffalo 

चारा  अब  चारा  नहीं, चारो  और  चुहाड़ |
खाते   पीते   लूटते,   जाय   कठौता  फाड़ |





जाय कठौता फाड़,  मवेशी दिन भर ढोवै |
कदम कदम पर रोज, रात मा  कांटे बोवै |




मीरा  रही  जगाय,  जगाये गोकुल सारा |
सोवै  घोडा   बेंच,  मरे  काहे  बे-चारा ??

7 comments:

  1. किसी के सो लेने पर हंगामा बरपा दिया लोगों ने।

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  2. सही है ||
    आँखे किसी की भी लग सकती हैं,
    पर यहाँ लोगों की लग गई
    आँखें लालू जी पर |
    मीरा ने जगाया क्यों ??

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  3. क्या बात है नया ही अंदाज़ लगा

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  4. चारा अब चारा नहीं, चारो और चुहाड़ |खाते पीते लूटते, जाय कठौता फाड़ |
    सुन्दर प्रस्तुति .लालू स्तुति के लिए आभार !ल्लालू जी ने चारे को नए आयाम दिए है इसे एडिबिल स्टेपल फ़ूड ,फोडर से फ़ूड बनाने के लिए लालू जी को सदैव ही याद रखा जाएगा .

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  5. भारत में घपलाबजी का श्रीगणेश करने वाले नेता जी दूध दुह कर नहीं अघाते ! चारा - बे - चारा ! अच्छी प्रस्तुति !

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  6. चारा और मीरा। ठीक है लेकिन बहुत नाइंसाफी है!

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