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Friday, 22 February 2013

बम फटे हैं बेशक - एलर्ट करते तो हों -




निवेदन  
मात्राएँ बाद में गिनना -
दो पंक्तियाँ आप भी लिखो- 

कल पूरा करंगे-
आज जल्दी में 
 लोग मरते तो हैं । 
जख्म भरते तो हैं ॥ 

बम फटे हैं बेशक -
एलर्ट करते तो हों । 

पब्लिक परेशां लगती 
कष्ट हरते तो हैं ॥ 

 देते गीदड़ भभकी 
दुश्मन डरते तो हैं । 

 दोषी पायेंगे सजा 
हम अकड़ते तो हैं  । 

 बघनखे शिवा पहने -
गले मिलते तो हैं ॥  

कंधे मजबूत हैं रविकर-
लाश धरते तो हैं ।


कल गुरू को मूँदा था, आज चेलों ने रूँदा है-


पिलपिलाया गूदा है । 
छी बड़ा बेहूदा  है । । 
मर रही पब्लिक तो क्या -
आँख दोनों मूँदा है ॥ 

जा कफ़न ले आ पुरकस 
इक फिदाइन कूदा है । 
कल गुरू को मूँदा था 
आज चेलों ने रूँदा है ॥

पाक में करता अनशन-
मुल्क भेजा फालूदा है ॥

3 comments:

  1. पुलिस हो भले ही चौकन्नी
    फिर भी लोग मरते तो हैं

    गृहमंत्री को हो भले ही खबर
    फिर भी बम फटते तो हैं

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  2. sahi kaha doshi payenge saza par kab koi nahi janta .

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  3. सच में आज समाज और ये इंसान दो ऐसे राहों पर खड़ा है जहाँ पर हम कुछ नहीं कर सकते और कुछ रोक भी नहीं जा सकता

    एक ऐसा इंसान जो दुसरे इंसानों का अपना शिकार बना रह है उसे खुद भी नहीं पता की वो किस की लड़ाई लड़ रहा है

    आज इस दुनिया में इतने दुर्योधन पैदा हो गए है की हमारे पास एक भीमसेन भी नहीं है
    मेरी नई रचना

    खुशबू

    प्रेमविरह

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