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Wednesday, 2 May 2012

मानव है मिष्ठान, 100 th Post

कुंडली
बड़े तराजू तौलता, हलवाई फिर आज । 
पंचमेल मिष्ठान को, इक डिब्बे में साज ।

इक डिब्बे में साज, मूड में बोला हंसकर ।
मानव है मिष्ठान, तेल मैदा जल शक्कर ।

नपी-तुली हो आंच, डाल के मावा काजू ।
रंग-रूप में ढाल, तोल ले बड़े तराजू ।।
दोहे-
यहाँ बतासा घूमता, लिए शुद्धतम रूप ।
*उदक-परीक्षा में फंसे, खोवे मूल स्वरूप ।। 
*पानी में डुबाना 
लड्डू का बेसन सड़ा, चढ़ा गुलाबी रंग ।
मंगल मंगल चढ़ रहे, हनुमत के सत्संग ।।

पेड़े-बर्फी बन गए,  नकली मावा औंट ।
मक्कारी में फंस रहे, नहीं सकेंगे लौट ।।

शहर जलेबी घूमती, चली इमरती संग  ।
लार टपकती देख के, हुई दंग मन-तंग ।।

रसगुल्लों ने पी लिया, रस से भरे प्रकोष्ठ ।
शक्करपाले भटकते, लेकर सूखे ओष्ठ ।।

मजे सजे ऊँचे सदन, राम राम हर याम ।
मिले पराया माल तो, लूट खाय बेदाम ।।

मीठे में कीड़े पड़े, बिजबिजाय बद-हाल  |
 चुन के दिल्ली भेजता, देते  डेरा डाल ।। 

कुंडली  

शीरे पर तैरा करे, काली काली मैल ।
सड़ जाये जब मैल तो, बदबू जाये फ़ैल |
बदबू जाये फ़ैल, दुग्ध से कर संस्कारित |
पुन: पकाए मैल, होय बढ़िया उपचारित |
हो जाये जब सान्द्र, बना लें खुटिया-गट्टे |
बन बढ़िया स्वादिष्ट, मिठाई चख दे फट्टे ||
दोहा 
खुटिया कबसे खट रही, इकदम सस्ते दाम ।
श्रम सीकर ही मूल है, यही सतत पैगाम ।।

9 comments:

  1. १००वी पोस्ट पर सुन्दर रचना हेतु बधाई स्वीकारें |

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  2. 100वीं पोस्ट की बहुत-बहुत बधाई!
    --
    आप अपने साहितय से सही सन्देश देते हैं!

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  3. १००वी पोस्ट, सुन्दर रचना, हेतु बधाई स्वीकारें |

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  4. शहर जलेबी घूमती, चली इमरती संग ।
    लार टपकती देख के, हुई दंग मन-तंग ।।
    शहर जलेबी घूमती, चली इमरती संग ।

    लार टपकती देख के, हुई दंग मन-तंग ।।
    बढ़िया प्रस्तुति .
    जीजा जोबनिया ज़लेबी भरी रसकी ,थारे साथ चलूंगी ,म्हाने जचगी . सौवीं पोस्ट मुबारक ,अनुपोस्ट मुबारक .
    कृपया यहाँ भी पधारें -

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  5. मजे सजे ऊँचे सदन, राम राम हर याम ।बढ़िया प्रस्तुति .
    मिले पराया माल तो, लूट खाय बेदाम ।।कृपया यहाँ भी पधारें -
    रोग जो अधेड़ों को ले आता है बचपन की गलियों में
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_03.html

    Posted 3rd May by veerubhai

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  6. बहुत ही बढिया।

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  7. इतनी स्वादिष्ट पोस्ट तो पहली बार चखी।

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  8. आपकी पोस्ट कल 19/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 861:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  9. सटीक दोहे के साथ मीठा-मीठा पैगाम !
    आभार!

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