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Thursday, 24 May 2012

दस जन, पथ पर डोलते, करके ढीली डोर -

 
कठपुतली बन नाचते, मीरा मोहन-मोर |
दस जन, पथ पर डोलते, करके ढीली डोर ||

कौतुहल वश ताकता, बबलू मन हैरान |
*मुटरी में हैं क्या रखे, ये बौने इन्सान ??
*पोटली

बौने बौने *वटु बने, **पटु रानी अभिजात |
कौतुकता लख बाल की, भूप मंद मुस्कात ||
*बालक **चालाक

राजा रानी दूर के, राजपुताना आय |
चौखाने की शाल में, रानी मन लिपटाय ||

भूप उवाच-
कथ-री तू *कथरी सरिस, क्यूँ मानस में फ़ैल ?
चौखाने चौसठ लखत, मन शतरंजी मैल ||
*नागफनी / बिछौना

बबलू उवाच-
हमरा-हुलके बाल मन, कौतुक बेतुक जोड़ |
माया-मुटरी दे हमें, भाग दुशाला ओढ़ ||

12 comments:

  1. भाई 10 कहकर
    मजाक मत उड़ाओ
    कुछ आदमी बढा़ओ ।

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    1. दस जनपथ का आदेश है भाई-

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  2. चित्र को सही जबान दिया| रवि भैय्या बधाई

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  3. कठपुतली बन नाचते, मीरा मोहन-मोर |
    दस जन, पथ पर डोलते, करके ढीली डोर ||
    मरेगी इनकी नानी ,भरें ये सबका पानी .
    बढ़िया प्रस्तुति .

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  4. भूप उवाच-
    कथ-री तू *कथरी सरिस, क्यूँ मानस में फ़ैल ?
    चौखाने चौसठ लखत, मन शतरंजी मैल |
    बहुत सुन्दर है भाई साहब .लाज़वाब शब्द संयोजन .

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  5. बहुत रोचक !

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  6. बड़ा ही अनमोल खजाना आप भर भर लाए
    मन को मेरे दोहे और पहेली दोनों ही भाए।

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  7. उत्तम लेखन आपका ............आया काफी पसंद
    इसलिये कर लिया रीडर के बक्से में बंद

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  8. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति

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  9. दस जनपथ वाले नाचते कम नचाते ज्यादा है ..
    बहुत बढ़िया ..

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