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Friday, 4 May 2012

छोट छोट शहरों में पैदा, बड़े बड़े शैतान -

भ्रूण भ्रान्तवश भंगकर, भटके भट भकुवान । 
पुत्र-मोहवश पापधी,  बूढ़ भये अकुलान ।

घर से मार-भगाए  बेटे  ।
बहना आगे आय समेटे  ।

छोट छोट शहरों में पैदा,  बड़े बड़े शैतान ।।  

कुंडली  
उदासीनता भ्राँतता, भटक रहे जो पैर ।
अवलोकन कर ले पुन:, करे खुदाई खैर।   

करे खुदाई खैर, बने जाते वैरागी ।
अपनों को कर गैर, बरे नफरत की आगी ।

दर्द हार गम रोग, व्यथा छल आंसू हाँसी ।
जीवन के सब तत्व, जियो फिर छोड़ उदासी ।।


7 comments:

  1. bilkul sahi kha g agar sab esko samghe

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  2. शैतान शहर या गाँव में होता है शैतान
    शभ्य जनों की शीलता देती उसको पहचान -
    सुन्दर रचना .....बधाईयाँ जी /

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  3. घर से मार-भगाए बेटे ।
    बहना आगे आय समेटे ।

    .....सार्थक संदेश देती बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  4. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

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  5. भ्रूण ह्त्या पर करारा व्यंग्य .बढ़िया शानदार कुंडली रविकर जी की .

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