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Thursday, 28 June 2012

होत ना आज्ञा बिन पैसा रे ।

 राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत  ना आज्ञा बिन पैसा रे ।।
Hanuman Ji

हस्पताल में राम जी, सीता को ले जाँय ।
कन्या का होता जनम, नर्स मिठाई खाँय ।।
 होत ना कन्या बिन पैसा रे । 

किन्नर चौदह धमकते, होय गली में शोर ।
इक्यावन सौ नोचते, देते बांह मरोर ।
बचे न भैया बिन पैसा रे ।

नियमित टीका-करण  हो, कन्या के प्रति फर्ज ।
संरक्षित पूरी हुई, पर रिश्वत का मर्ज ।
थमें ना कबहूँ बिन पैसा रे ।

छठियारी में गाँव भर, छक कर खाया भोज ।
पंचायत फाइन करे, इक ठो गलती खोज ।
मिली न छुट्टी बिन पैसा रे ।।

पांच साल की हो चली, बिटिया ज्यों-स्कूल ।
रविकर को भारी पड़ी, जन्म प्रमाण की भूल । 
बने न भैया बिन पैसा रे । 

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