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Friday, 8 June 2012

गुरु नानक का धाम, बसे रविकर के गुरुवर

साइबर कैफे से -

रूप चन्द्र सा है सरस, शीतल मंद समीर ।
ज्ञान ध्यान विज्ञान मिथ, धीर वीर गंभीर ।


धीर वीर गंभीर, सकल शास्त्रों के ज्ञाता ।
बसे शारदा तीर, खटीमा जग विख्याता ।

गुरु नानक का धाम, बसे रविकर के गुरुवर ।
बारम्बार प्रणाम, मिला दर्शन का अवसर ।।

बाकी धनबाद पहुंचकर -

9 comments:

  1. मेरा भी प्रणाम ,प्रभु के चरणों में ......
    आभार आपका !

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  2. कोटी कोटी प्रणाम!

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. स्वागत है । जल्दी पहुँचो।

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  5. waah aapke sath maine bhi darshan kar liya ...

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  6. गुरु नानक का धाम, बसे रविकर के गुरुवर ।
    बारम्बार प्रणाम, मिला दर्शन का अवसर ।।

    शिष्यत्व का सुख बोध कोई बिरला ही उठा पाता है .

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  7. साइबर कैफे से -

    रूप चन्द्र सा है सरस, शीतल मंद समीर ।
    ज्ञान ध्यान विज्ञान मिथ, धीर वीर गंभीर ।

    भाई रविकर जी फैजाबादी लेखन के प्रति आपके समर्पण और प्रति -बढता को सलाम .

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  8. भाई रविकर जी फैजाबादी लेखन के प्रति आपके समर्पण और प्रति -बढता को सलाम .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    पौधे भी संवाद में, रत रहते दिन रात |
    गेहूं जौ मिलते गले, खटखटात जड़ जात |
    ram ram bhai
    बुधवार, 13 जून 2012
    हवा में झूमते लहलहाते वे परस्पर संवाद करते हैं
    हवा में झूमते लहलहाते वे परस्पर संवाद करते हैं


    पौधे भी संवाद में, रत रहते दिन रात ,गेहूं जौ मिलते गले, खटखटात जड़ जात --|-भाई रविकर जी फैजाबादी
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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