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Tuesday, 19 June 2012

हर घडी हर सांस में ना आह भरते-

(1)
मौत से जो सौत सी वे डाह करते |
जान कर वे जान की परवाह करते |
सत्य-शाश्वत मृत्यु को रविकर समझ-
हर घडी हर सांस में ना आह भरते ।।

5 comments:

  1. sahi bat kahi aape ravikar jee jine ke liye maut se dosti jaruri hai ...isse kya darna...

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  2. वाह...क्या कहने।
    माँ सरस्वती का वरद हस्त आपके सिर पर सदा बना रहे!

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  3. मौत से जो सौत सी वे डाह करते |
    जान कर वे जान की परवाह करते |
    सत्य-शाश्वत मृत्यु को रविकर समझ-
    हर घडी हर सांस में ना आह भरते ।।
    क्या खूब लिखा है आपने मौत से जो सौत सी वे डाह करते .. . अच्छी प्रस्तुति .कृपया यहाँ भी पधारें -


    बुधवार, 20 जून 2012
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    क्या गड़बड़ है साहब चीनी में
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  4. Gajab ka likha hai sir ji.

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