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Wednesday, 17 July 2013

सेतु कुम्भ केदार, मिटाने का दे ठीका-

  एक महीना- त्रासदी उपरान्त !

पी.सी.गोदियाल "परचेत"  

लगता है इक पार्टी, मिटा राष्ट्र-आदर्श |
श्रद्धा-चिन्हों को हटा, करे आत्म-उत्कर्ष |

करे आत्म-उत्कर्ष, योजनाबद्ध तरीका |
सेतु कुम्भ केदार, मिटाने का दे ठीका |

धर्मावलम्बी मूर्ख, नहीं फिर भी है जगता |
सत्ता इनको सौंप, चैन से सोने लगता ||

क्या से क्या हो गया !

पी.सी.गोदियाल "परचेत"
पहले तो थे घेरते, आज लुटेरे टेर |
एक बेर थे लूटते, अब लूंटे हर बेर ||
 


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