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Saturday, 5 October 2013

रविकर जीवन व्यस्त, करे कविता जनहित की-

चित की शुचिता के लिए, नित्य कर्म निबटाय |
ध्यान मग्न हो जाइये, पड़े अनंत उपाय |

पड़े अनंत उपाय, सुबह योगासन करिये । 
रहिये शांत विनम्र, दीन की पीड़ा हरिये । 

रविकर-जीवन व्यस्त, करे कविता जनहित की |
आत्मोत्थान उपाय, बताये शुचिता चित की |

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (06-10-2013) हे दुर्गा माता: चर्चा मंच-1390 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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