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Wednesday, 30 October 2013

कर नारायण ना नुकुर, गर है नारा ढील -


रविकर लखनऊ में २०-१०-१३ : फ़ोटो मनु
नारा से नाराजगी, नौ सौ चूहे लील |
कर नारायण ना-नुकुर, गर है नारा ढील | 

गर है नारा ढील, नहीं हज-हाजत जाना |
जा बाबा को भूल, स्वयं की जान बचाना |

नेता नारा भक्त, नहीं अब कोई चारा |
दाढ़ी बाल बनाय, पकड़ के भाग किनारा ||

4 comments:

  1. क्या बात है गजब ढा रहे हो
    हर जगह छा रहे हो !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (31-10-2013) "सबसे नशीला जाम है" चर्चा - 1415 में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बड़ा ही तीक्ष्ण कटाक्ष

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  4. दिवाली की शुभकामनाएं
    नई पोस्ट हम-तुम अकेले

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