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Thursday, 22 March 2012

राज गुरू सिरमौर, राज से हारे हारे-


Bhagat-Singh-Sukhdev-Rajguru
 ताजम-ताजा मामला, जाती पब्लिक भूल ।
बात पुरानी हो गई, अब क्या देना तूल । 

अब क्या देना तूल, भगत सुखदेव विचारे ।
राज गुरू सिरमौर, राज से हारे हारे ।

डंका कुल संसार, शहीदे आजम बाजा । 
ये पब्लिक सरकार, भूलते ताजम-ताजा । 

7 comments:

  1. सच है...भूल जाते हैं लोग........
    मगर आपने याद दिलाया....
    शुक्रिया..
    श्रद्धा सुमन शहीदों को...
    सादर.

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    आपको नव सम्वत्सर-2069 की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  3. नव संवत्सर का आरंभन सुख शांति समृद्धि का वाहक बने हार्दिक अभिनन्दन नव वर्ष की मंगल शुभकामनायें/ सुन्दर प्रेरक भाव में रचना बधाईयाँ जी /

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  4. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....

    इंडिया दर्पण की ओर से नव संवत्सर व नवरात्रि की शुभकामनाएँ।

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  5. aakroshit man ki panktiyan bahut khoob. teeno shaheedon ko shat shat naman.

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  6. अमर शहीदों को नमन..

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