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Thursday, 15 March 2012

सर मनसर कैलास, बही है गंगा धारा --

कैलाश जी को बधाई
 
 
 
बंजारा चलता गया, सौ पोस्टों के पार ।
प्रेम पूर्वक सींच के, देता ख़ुशी अपार ।

देता ख़ुशी अपार, पोस्ट तो ग्राम बन गए ।
पा जीवन का सार, ग्राम सुखधाम बन गए ।

सर मनसर कैलास, बही है गंगा धारा ।
पग पग चलता जाय, विज्ञ सज्जन बंजारा ।

10 comments:

  1. kailaash ji ko humari aur se bhi badhaai aapne bahut achcha likha hai.

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    100वीं पोस्ट की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  3. हमारी ओर से भी विशेष बधाई।

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  4. देता ख़ुशी अपार, पोस्ट तो ग्राम बन गए ।
    पा जीवन का सार, ग्राम सुखधाम बन गए ।

    बहुत सुन्दर.........

    सादर.

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  5. 100 वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई.

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति.. रविकर जी और सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार...

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  8. 100 post poore hone par badhai

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