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Thursday, 19 December 2013

कातिल होती मीडिया, मौत रही नित न्यौत-


कातिल होती मीडिया, मौत रही नित न्यौत |
हिल्ले रोजी कह रहे, कहें बहाने मौत |

कहें बहाने मौत, बनी है निर्णय-कर्ता |
करता कोई और, और कोई है भरता |

खबरंडी व्यवसाय, करे धन-दौलत हासिल |
स्वयं रहा हित साध, मीडिया कितना कातिल ||

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (21-12-2013) "हर टुकड़े में चांद" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1468 पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  2. सुंदर रचना
    भावपूर्ण और प्रभावशाली
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

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  3. इंतज़ार और अभी

    रायशुमारी फिर करें, दे सन्देश नकार |
    तीस फीसदी वोट पा, करे आप व्यभिचार |

    करे आप व्यभिचार, तवज्जो पुन: सभा को |
    आप बड़े बेचैन, जरा अंतर्मन झांको |

    फिक्स किया है गेम, किन्तु नौटंकी जारी |
    बना नहीं सरकार, बताती रायशुमारी ||
    खुलेगी सिम सिम सोम जी के दिन .

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