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Saturday, 4 June 2011

बाबा रामदेव का आन्दोलन

                                 (1)
एक बार फिर से पांचाली  इस  परिसर  में गई घसीटी |
एक बार फिर से शकुनी * ने धर्मराज* की गोटी पीटी ||
फिर चौसर की इस बिसात पर मामा अपने कपट खेल से-
सम्मान छीन वनवास भेजता दु:शासन के हेल-मेल से ||
एक बार फिर से धोखे से वरनावत का महल जलाया  
एक बार फिर से कौरव ने अत्याचारी बिगुल बजाया ||
एक बार फिर से दु:शासन*, दुर्योधन* उन्मत्त हुआ है |
एक बार फिर से विराट की गौवों का अपहरण हुआ है ||

धृतराष्ट्र*  के  पूतों  से अब  सावधान    हो  जाओ   तो | 
इन  अंधी  दीवारों  से  मत  सिर  अपने    टकराव  तो  ||
अपने - अपने  हिस्से  का  अब  युद्ध  यहाँ   लड़ना होगा 
सह चुके बहुत कह चुके बहुत अब करना या मरना होगा 
तुम दूर खड़े  मत  देखो  अब, यह  चक्रव्यूह  हम तोड़ेंगे |
कंधे  से  कन्धा  जोड़-जोड़  मनका मनका  अब जोड़ेंगे ||
                                 (2)
भीषण  भीम  गर्जना  पर  कानों  में  रुई  घुसा  लेना | 
न रात-पहर का सपना ये, चुटकी तू  काट, कटा लेना ||
जिन हाथों से  अनसन-कर्ता  पर  है  तूने   छापा  डाला  
जिस काले हृदय से करता सत्ता के संग मुंह  काला  ||

रणभेरी बज चुकी  हाथ  को   जड़   से  हमी  उखाड़ेंगे | 
स्वेद-रक्त   पीने  को   तेरी   छाती    काली    फाड़ेंगे ||
सारी   सत्ता   सारा   वैभव  भोग-विलासी जीवन पर |
थू-थू  सारी  जनता  करती  चुल्लू  भर  पानी में मर ||

सुई नोक भर भूमि न दूंगा कौरव सारे अकड़  पड़े |
मांग हमारी जायज है, मैदान में कहते कृष्ण खड़े ||
चक्र सुदर्शन चमक उठा,ऐ संभल गुरु द्रोही संभाल |
अंतिम  चेतावनी चेत, जनता बन आती महाकाल ||






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