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Saturday, 9 March 2013

बोल गया परवेज, परेशां पाकी बटके -


लटके झटके पाक हैं, पर नीयत नापाक |
ख्वाजा के दरबार में, राजा रगड़े नाक |

राजा रगड़े नाक, जियारत अमन-चैन हित |
हरदम हावी फौज, रहे किस तरह सुरक्षित |

बोल गया परवेज, परेशां पाकी बटके |
सिर पर उत तलवार, इधर कुल मसले लटके || 

4 comments:

  1. नीयत कभी पाक नहीं दिखी ...
    सुन्दर !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ...!

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  3. सुन्दर प्रस्तुति बेशक इनकी नियत पर भरोसा करना मुमकिन नहीं है
    महाशिवरात्रि की हार्दिक मंगल कामना

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  4. वाह ...इस कटाक्ष के सड़के जाऊं
    इस पर भी एक नजर .....आपका स्वागत है ....
    http://shikhagupta83.blogspot.in/2013/03/blog-post_9.html

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