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Friday, 15 March 2013

नाग गले शशि गंग धरे तन भस्म मले शिथिलाय रहे-

मदिरा सवैया 

स्वारथ में कुल देव पड़े, शुभ मंथन लाभ उठाय रहे । 
 
भंग-तरंग चढ़े सिर पे शिव को विषपान कराय रहे । 
 
कंठ रुका विष देह जला शिव, पर्वत पे भरमाय रहे । 
 
नाग गले शशि गंग धरे तन भस्म मले शिथिलाय रहे ।

6 comments:

  1. जय बम बम भोले नाथ,सुन्दर रचना

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  3. ओम् नमः शिवायः

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