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Wednesday, 26 September 2012

D.U. Rape: अच्छा होता स्वयं, स्वयं को जरा रोकते-

बुक से किंवा फेसबुक, बुक होती जब डेट ।
धोखे में रख के स्वजन,  कर धोखे से भेंट । 

कर धोखे से भेंट, झोंक में बराबरी की ।
लेवे  डेट लपेट, शरारत करे शरीकी ।

दिखे फेस पर ग्लानि, क्रोध में केस ठोकते ।
अच्छा होता स्वयं, स्वयं को जरा रोकते ।।



 जनसन्देश 04-07-2012 में दो माह पहले 
पैसे उगते पेड़ पर , मनमोहनी ख़याल ।
सहमत दिखते  हैं कई, यूरोपी कंगाल ।

यूरोपी कंगाल, कम्पनी ईस्ट बनी है ।
प्रांत कई बदहाल, प्रणव पर तनातनी है ।

निरहू नवनिर्माण, पाय के पैकेज ऐसे ।
हिंदुत्व-वाद कबाड़, करे नित पैसे पैसे ।।


1 comment:

  1. रोक जरूरी है एक सीमा के बाद !

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