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Monday, 3 September 2012

दान दून दे दनादन, दमके दिल्ली राज-

दाने दाने को दिखा, कोयलांचल मुहताज ।
दान दून दे दनादन, दमके दिल्ली राज ।

दमके दिल्ली राज, घुटे ही करें घुटाला ।
बाशिंदों पर गाज, किसी ने नहीं सँभाला ।

नक्सल भी नाराज, विषैला धुवाँ मुहाने ।
धधके अंतर आग, लुटाते लंठ खदाने ।।



अंगारों पर ही बसा, है झरिया अधिकाँश |
भू-धसान हरदिन घटे, जलता जिन्दा मांस |
जलता जिन्दा मांस, जलाने वालों सुन लो |
इक बढ़िया सी मौत, स्वयं से पहले चुन लो |
खड़ी हमारी खाट, करे चालाक मिनिस्टर |
करता बंदरबांट, कटे वासेपुर अन्दर ||


कौड़ी कौड़ी बेंचते,  झारखंड का माल ।
बाशिंदे कंगाल है,  पूछे मौत सवाल ।
पूछे मौत सवाल, आज ही क्या आ जाऊं ?
पल पल देते टाल, हाल क्या तुम्हें बताऊँ?
डूब मरे सरकार, घुटाले करके भारी ।
होते हम तैयार,  रखो तुम भी तैयारी ।।

endless_fires_10.jpg
अंग नंग अंगा दफ़न, कफन बिना फनकार ।
रंग ढंग बदले सकल, रहा लील अंगार ।
रहा लील अंगार, सार जीवन का पाया ।
होवे न उद्धार,  आग जिसने भड़काया ।
रविकर भरसक खाय, लिए मुट्ठी अंगारा ।
राक्षस किन्तु जलाय, कोयला  रखे दुबारा  ।।

10 comments:

  1. सच कहा आपने यूँ ही सरकारे चली जा रही है ..किस ओर इसका कुछ पता नही ..
    बहुत खूब!

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  2. कहीं की बिजली
    कहीं का कोयला
    दिल्ली खा खा जाये
    बिल्ली बन बन
    म्याँऊ करो
    यही सीख दे जाये !

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  3. सच्चाई से कही गयी बात अच्छी लगी.........

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  4. पल पल देते टाल, हाल क्या तुम्हें बताऊँ?
    डूब मरे सरकार, घुटाले करके भारी ।
    होते हम तैयार, रखो तुम भी तैयारी ।।
    कौड़ी कौड़ी बेंचते, झारखंड का माल ।
    बाशिंदे कंगाल है, पूछे मौत सवाल ।
    पूछे मौत सवाल, आज ही क्या आ जाऊं ?
    पल पल देते टाल, हाल क्या तुम्हें बताऊँ?
    डूब मरे सरकार, घुटाले करके भारी ।
    होते हम तैयार, रखो तुम भी तैयारी ।।

    मैया मोरी कसम तोरी ,मैं नाहीं कोयला खायो ,
    पक्ष विपक्ष सब बैर पड़ें हैं बरबस मुख पे लगायो ....

    मैया मोरी मैं नाहीं कोयला खायो ....

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  5. ये बढ़िया रही... :)
    अच्छा खबर ले ली चोरों की आपने कविता में

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  6. बेहतरीन सरस रसमयी सृजन मन को उद्वेलित करते हुए ...... प्रशंसनीय ....बधाईयाँ जी,

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  7. समसामायिक रचना...आभार!

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  8. अंग नंग संग भुजंग, का फन बिना फुफकार

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  9. बहुत जोरदार, सामयिक और सटीक ।

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