Follow by Email

Friday, 21 September 2012

भैया-बहना बांधते, मोहन रक्षा-सूत्र-

दीदी-दादा तानते, कुर्सी वो मजबूत ।
भैया-बहना बांधते, मोहन रक्षा-सूत्र ।

मोहन रक्षा-सूत्र, सकल यू पी भरमाया ।
जीवन भर बंगाल,  कहीं मुंबई  कमाया ।

एफ़ डी आई, तेल, सिलिंडर काटे कौवा ।
साम्प्रदायिक संघ, हुआ हिंदू ही हौव्वा ।


3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (22-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  2. व्यंग्य विडंबना .बढ़िया कटाक्ष .

    ReplyDelete