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Tuesday, 11 September 2012

गैंगरेप के बाद, चितेरे चढ़ बैठोगे ??

Bharat Ratna Deserving Cartoonist Aseem Trivedi granted bail by Bombay High Court


कार्टूनिस्ट असीम पर मेरी-टिप्पणी : 
जानता हूँ आप सहमत नहीं हैं-

(1)
सीमा से बाहर गए, कार्टूनिस्ट असीम |
झंडा संसद सिंह बने, बेमतलब में थीम |
बेमतलब में थीम, यहाँ आजम की डाइन |
कितनी लगे निरीह, नहीं अच्छे ये साइन |
अभिव्यक्ति की धार, भोथरी हो ना जाये |
खींचो लक्ष्मण रेख, स्वयं अनुशासन लाये ||  

(2)
बड़ा वाकया मार्मिक, संवेदना असीम |
व्यंग विधा इक आग है, चढ़ा करेला नीम |
चढ़ा करेला नीम, बहुत अफसोसनाक है |
अगला कैसा चित्र, करो क्या देश ख़ाक है ?

सुधरे न हालात, हाथ में फिर क्या लोगे ?
 गैंगरेप के बाद, चितेरे चढ़ बैठोगे  ??

10 comments:

  1. शुभकामनाएँ!
    ईश्वर सद्बुद्धि दे, देश के नायकों को!

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  2. Ravi Sinha's status.
    6 hours ago
    यथार्थ सत्य-
    जिसने दी अभिव्यक्ति की आजादी तुने उसी राष्ट्र के सम्मान पे थूका है,
    हे कार्टून गिरोह के देशद्रोही दलाल तु हिन्दुस्तानी कहलाने के नाम पे झूठा है,
    भारत माँ के जय जयकार करके उसी के आँचल को अन्ना गिरोह ने लुटा है,
    राष्ट्र मान के गौरव का माखौल बनाके तु भी विदेशी दलालों के पैसे पे झुका है....

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  3. मंगलवार, 11 सितम्बर 2012
    देश की तो अवधारणा ही खत्म कर दी है इस सरकार ने

    आज भारत के लोग बहुत उत्तप्त हैं .वर्तमान सरकार ने जो स्थिति बना दी है वह अब ज्यादा दुर्गन्ध देने लगी है .इसलिए जो संविधानिक संस्थाओं को गिरा रहें हैं उन वक्रमुखियों के मुंह से देश की प्रतिष्ठा की बात अच्छी नहीं लगती .चाहे वह दिग्विजय सिंह हों या मनीष तिवारी या ब्लॉग जगत के आधा सच वाले महेंद्र श्रीवास्तव साहब .

    असीम त्रिवेदी की शिकायत करने वाले ये वामपंथी वहीँ हैं जो आपातकाल में इंदिराजी का पाद सूंघते थे .और फूले नहीं समाते थे .

    त्रिवेदी जी असीम ने सिर्फ अपने कार्टूनों की मार्फ़त सरकार को आइना दिखलाया है कि देखो तुमने देश की हालत आज क्या कर दी है .

    अशोक की लाट में जो तीन शेर मुखरित थे वह हमारे शौर्य के प्रतीक थे .आज उन तमाम शेरों को सरकार ने भेड़ियाबना दिया है .और भेड़िया आप जानते हैं मौक़ा मिलने पर मरे हुए शिकार चट कर जाता है .शौर्य का प्रतीक नहीं हैं .
    असीम त्रिवेदी ने अशोक की लाट में तीन भेड़िये दिखाके यही संकेत दिया है .

    और कसाब तो संविधान क्या सारे भारत धर्मी समाज के मुंह पे मूत रहा है ये सरकार उसे फांसी देने में वोट बैंक की गिरावट महसूस करती है .
    क्या सिर्फ सोनिया गांधी की जय बोलना इस देश में अब शौर्य का प्रतीक रह गया है .ये कोंग्रेसी इसके अलावा और क्या करते हैं ?

    क्या रह गई आज देश की अवधारणा ?चीनी रक्षा मंत्री जब भारत आये उन्होंने अमर जवान ज्योति पे जाने से मना कर दिया .देश में स्वाभिमान होता ,उन्हें वापस भेज देता .
    बात साफ है आज नेताओं का आचरण टॉयलिट से भी गंदा है .
    टॉयलट तो फिर भी साफ़ कर लिया जाएगा .असीम त्रिवेदी ने कसाब को अपने कार्टून में संविधान के मुंह पे मूतता हुआ दिखाया है उसे नेताओं के मुंह पे मूतता हुआ दिखाना चाहिए था .ये उसकी गरिमा थी उसने ऐसा नहीं किया .
    सरकार किस किसको रोकेगी .आज पूरा भारत धर्मी समाज असीम त्रिवेदी के साथ खड़ा है ,देश में विदेश में ,असीम त्रिवेदी भारतीय विचार से जुड़ें हैं .और भारतीय विचार के कार्टून इन वक्र मुखी रक्त रंगी लेफ्टियों को रास नहीं आते इसलिए उसकी शिकायत कर दी .इस देश की भयभीत पुलिस ने उसे गिरिफ्तार कर लिया .श्रीमान न्यायालय ने उसे पुलिस रिमांड पे भेज दिया .


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  4. न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए असीम त्रिवेदी को राजद्रोह के आरोप से मुक्त करके निजी मुचलके पर रिहा कर दिया है ।
    ...न्यायालय को नमन।

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  5. नही ऐसा मत कहिये क्योंकि इस देश के कर्ताधर्ताओ ने कोई सीमा नही छोडी है तो असीम ही क्यों पीछे रहे

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  6. वाकई में अभी कुछ बचा है !

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  7. सहमत...ठीक यही बात कल मैंने भी अपने ब्लॉग पर कही...

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  8. विधा यहां व्यंग्य नहीं थी , यहां विधा कार्टून थी । और न्यायपालिका हमसे बेहतर समझती है कानून को सो अब उसके फ़ैसले के बाद कहने को बचा क्या है

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