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Wednesday, 29 August 2012

सपना मिडिल क्लास, देखता कैसे कैसे-

इ'स्टेटस सिम्बल बना, नवधनाढ्य का एक । 
मस्त दुकानें चल रहीं, बाबा बैठ अनेक । 



बाबा बैठ अनेक, दलाली करते आधे ।
फँसते ग्राहक नए, सभी को बाबा साधे ।

सपना मिडिल क्लास, देखता कैसे कैसे  ।
चाहे बने अमीर, लुटा दे जेवर-पैसे ।। 

4 comments:

  1. ...चलो,कुछ तूफ़ानी हो जाय !

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  2. बाबागीरी पर बड़ा सटीक व्यंग्य .
    बढ़िया प्रस्तुति है कृपया यहाँ भी पधारे -
    ram ram bhai

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  3. आपकी पोस्ट 30/8/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 987 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  4. सपना मिडिल क्लास, देखता कैसे कैसे ।
    चाहे बने अमीर, लुटा दे जेवर-पैसे ।।
    बहुत खूब
    मेरे शहर का सीन
    कुछ और बता रहा है
    आय है रुपिया हजार
    बच्चा मोटर साइकिल
    में जा रहा है
    जेवर पैसे लुटाने
    तक भी चलेगा
    क्या हो जब
    बच्चा लुटेरा बनेगा !

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