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Tuesday, 14 August 2012

आज हैदराबाद में, फहरा झंडा पाक-

(1)
जंगल में जनतंत्र हो, जमा जानवर ढेर |
करे खिलाफत कोसते, हाय हाय रे शेर |


हाय हाय रे शेर, कान पर जूं न रेंगा |
हरदिन शाम सवेर, लगे आजादी देगा |


छोडो भाषण मीठ, करो मिल दंगा - दंगल |
शासक लुच्चा ढीठ, बचाओ रविकर जंगल ||

(2)

आज हैदराबाद में, फहरा झंडा पाक |
इससे पहले मुंबई, कैसे हुई हलाक | 

कैसे हुई हलाक, इरादे बेहद कातिल |
कर बदतर हालात, मरोगे खुद ही जाहिल |

रविकर का अंदाज, नहीं तुझको अंदाजा |
निकले न आवाज, बन्द हो गर दरवाजा ||

4 comments:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

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  2. बहुत सुन्दर सन्देश...स्वतन्त्रतादिवस की पूर्व संध्या पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  3. छोडो भाषण मीठ, करो मिल दंगा - दंगल |
    शासक लुच्चा ढीठ, बचाओ रविकर जंगल ||
    मौन सिंह हैं "मौन ",करो जंगल में मंगल,
    कहाँ गई सब "आब ",सूख गया भाखड़ा नंगल .

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  4. हाय हाय रे शेर, कान पर जूं न रेंगा |
    हरदिन शाम सवेर, लगे आजादी देगा |

    शेर की हाय हाय कर रहा है
    क्या गजब कर रहा है
    इसे पता नहीं क्या हो गया है
    बिल्कुल भी नहीं डर रहा है !

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