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Sunday, 11 November 2012

खेले सारी रात, लौटता बुद्धू भोरे

दीप पर्व की
हार्दिक शुभकामनायें

देह देहरी देहरे, दो, दो दिया जलाय-रविकर


 डोरे डाले आज फिर, किन्तु जुआरी जात ।
गृह लक्ष्मी करती जतन, पर खाती नित मात ।

पर खाती नित मात, पूजती लक्षि-गणेशा ।
पांच मिनट की बोल, निकलता दुष्ट हमेशा  ।

 खेले सारी रात, लौटता बुद्धू भोरे ।
 जेब तंग, तन ढील,  आँख में रक्तिम डोरे ।।

7 comments:

  1. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    त्यौहारों की शृंखला में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धनपूजा और भाईदूज का हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  3. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  4. दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

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  5. बहुत बढिया । आपको दीपावली की शुभकामनायें

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  6. न माने चाहे किसी का मन
    कहे कवि रविकर सत्यवचन ....
    दीपावली की शुभकामनायें!

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